कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के बाद मंगलवार को असम पुलिस की एक टीम खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची। यह घटनाक्रम असम विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक दो दिन पहले हुआ है, जिसने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक असम पुलिस की टीम दिल्ली पुलिस की सहायता से यह कार्रवाई कर रही है। कानूनी प्रक्रिया के तहत किसी दूसरे राज्य की पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी में अभियान चलाने से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होता है। यह पूरी कार्रवाई गुवाहाटी पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच में दर्ज केस नंबर 04/2026 के आधार पर की जा रही है जिसमें खेड़ा पर झूठे और मानहानि कारक आरोप लगाने का दावा किया गया है। 
फर्जी पासपोर्ट और नागरिकता के आरोप
विवाद की शुरुआत रविवार को हुई जब पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भूइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और उनकी नागरिकता की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने इन दस्तावेजों को चुनावी पात्रता से जोड़ते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। 
इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रिनिकी भूइयां सरमा ने इन्हें पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने दावा किया कि खेड़ा द्वारा पेश किए गए दस्तावेज 'एआई-जनरेटेड' (AI-generated) और फोटोशॉप्ड हैं। उन्होंने इसे अपने व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए मामले की गहन जांच की मांग की है।
हिमंत बिस्वा सरमा की तीखी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वह खेड़ा के खिलाफ दीवानी और आपराधिक मानहानि का मुकदमा शुरू करेंगे। उन्होंने एक सार्वजनिक बयान में कहा, "ये आरोप दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित हैं। कानून अपना काम करेगा।" मुख्यमंत्री ने खेड़ा द्वारा दिखाए गए दस्तावेजों में कई विसंगतियों का भी जिक्र किया, जिसमें वर्तनी की गलतियां और पासपोर्ट डेटा में अनियमितताएं शामिल हैं, जो डिजिटल हेरफेर की ओर इशारा करती हैं।
मतदान से ठीक पहले राजनीतिक उबाल
राज्य में 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में इस कानूनी कार्रवाई ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस खेमे ने खेड़ा का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री की संपत्तियों की जांच की मांग दोहराई है। सांसद गौरव गोगोई ने इस मुद्दे पर पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है। चुनाव से ऐन पहले हुई इस कार्रवाई ने असम के चुनावी दंगल में भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत शुचिता के बहस को केंद्र में ला दिया है। 
-Legend News

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