स्‍पैम और फालतू कॉल्‍स करके परेशान करने वाली अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटिंग कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई को इस दिशा में कामयाबी मिली है। सितंबर और अक्‍टूबर महीने में कुल 318 कंपनियां ब्‍लैकलिस्‍ट की गई हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्राई के चेयरमैन अनि‍ल कुमार लाहोटी ने बताया है कि अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटिंग कंपनियों के खिलाफ उपभोक्ताओं की शिकायतें अक्‍टूबर में घटकर 2.16 लाख रह गईं। सितंबर में 3.12 लाख शिकायतें आई थीं। हालांकि अभी भी कार्रवाई में एक परेशानी आ रही है।
स्पैम कॉल्स के खिलाफ एक्‍शन लेना कितना चुनौती भरा?
ईटी टेलिकॉम की रिपोर्ट (ref.) के अनुसार, स्‍पैम कॉल्‍स के ख‍िलाफ एक्‍शन लेने में ट्राई के सामने कई चुनौतियां आईं, जिनमें से एक है DLT यानी डिस्‍ट्रीब्‍यूटेड लेजर टेक्‍नोलॉजी प्‍लेटफॉर्म पर शिकायतें ना आना। रिपोर्ट के अनुसार, DLT प्‍लेटफॉर्म पर डीएनडी यानी डु नॉट डिस्‍टर्ब में लोग शिकायतें नहीं कर रहे थे। ट्राई का कहना है कि स्‍पैमर्स के ख‍िलाफ तभी कार्रवाई की जा सकती है, जब डीएनडी प्‍लेटफॉर्म पर लोग कंप्‍लेंट दर्ज कराएंगे। 
1 साल में 21 लाख मोबाइल नंबर ब्‍लॉक
ट्राई ने 1 साल में करीब 21 लाख (2.1 मिलियन) मोबाइल नंबरों को ब्लॉक किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में वायरलैस यूजर्स की एक्‍ट‍िव संख्‍या करीब 1.10 अरब है। स्‍पैम कॉल से परेशान लोग अपने फोन के कॉलिंग ऐप पर जाकर उस नंबर को ब्‍लॉक कर देते हैं, लेकिन ट्राई को इसकी जानकारी नहीं देते। इसका सबसे अच्‍छा तरीका है ‘डीएनडी ऐप’। डीएनडी ऐप को ट्राई ने तैयार करवाया है ताकि लोग स्‍पैम कॉल्‍स की जानकारी दें और ट्राई उस पर कार्रवाई करे। यह ऐप प्‍ले स्‍टोर और ऐपल ऐप स्‍टोर से इंस्‍टॉल किया जा सकता है। 
कार्रवाई का द‍िख रहा असर
ट्राई की तरफ से की जा रही कार्रवाई का असर दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स के खिलाफ 3.12 लाख शिकायतें थीं, जो अगले महीने घटकर 2.16 लाख हो गईं। इस साल अक्टूबर में रजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स के खिलाफ केवल 39,000 शिकायतें आईं, जबकि सितंबर में यह संख्या 71,000 थी। हालांकि ट्राई इससे संतुष्‍ट नहीं है। वह कार्रवाई के दायरे को और बढ़ाना चाहती है और इसके लिए उपभोक्‍ताओं को जागरूक किया जा रहा है। 
स्‍पैम कॉल पर कैसे लगती है रोक?
जब भी कोई यूजर किसी स्‍पैम कॉल से परेशान होकर उसकी शिकायत ट्राई के डीएनडी ऐप पर करता है, तो शिकायत को संबंधित टेलिकॉम ऑपरेटर को भेजा जाता है। वेरिफ‍िकेशन होता है और जांच की जाती है कि वह नंबर स्‍पैम कॉल में शामिल है या नहीं। दोषी पाए जाने पर नंबर को डिस्‍कनेक्‍ट करके नेटवर्क से ब्‍लॉक कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्र‍िया में आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्‍तेमाल भी होता है।
-Legend News

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