पश्चिम बंगाल की सियासत को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है, जो तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को तकलीफ पहुंचा सकती है। टीएमसी को छोड़ने वाले तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रे, प्रकाश चिक बड़ाईक ने भाजपा ज्वाइन कर लिया है। कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य की उपस्थिति में ये तीनों पूर्व टीएमसी नेता भाजपा में शामिल हुए। बता दें कि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा को पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत मिली और टीएमसी को हार का सामना करना पड़ा। हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल के कई बड़े नेताओं ने उनका साथ छोड़ दिया। 
तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, प्रकाश चिक बारिक और सुष्मिता देव ने भाजपा का दामन थाम लिया है। अब इसके आगे 24 जुलाई को राज्यसभा चुनाव होने हैं और ऐसी अटकलें हैं कि वे उस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार हो सकते हैं।
क्या कहा सुखेंदु शेखर रॉय ने?
भाजपा में शामिल होने के बाद TMC के पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा, "...भारत के किसी भी राज्य में शायद ही कभी 96-97 प्रतिशत मतदान हुआ हो, जैसा कि हमारी राष्ट्रपति ने इस चुनाव के बारे में कहा। उनका (ममता बनर्जी) खेल खत्म हो चुका है; उनकी पार्टी खत्म हो चुकी है। इसलिए, उस पर और चर्चा करना बेकार है... दूसरे राज्यों में, सत्ताधारी और विपक्षी दल आमतौर पर विकास, प्रगति या खास एजेंडे को लागू करने के लिए केंद्र सरकार के पास मिलकर जाते हैं। लेकिन यहां, हमने बंद, हड़ताल और जुलूसों के ज़रिए केंद्र का विरोध करने पर ही ध्यान दिया।
पीएम-सीएम की तारीफ की
सुखेंदु ने कहा, इससे बंगाल की तीन पीढ़ियां बर्बाद हो गईं; जिनके पास मौके थे, वे राज्य छोड़कर चले गए। जबकि भारत के ज़्यादातर राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गए 'विकसित भारत' के विज़न और रोडमैप को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए, हम चोरी-चकारी में लगे रहे। हम लुटेरों और बलात्कारियों को बचा रहे थे; ज़ाहिर है, ऐसा सिलसिला तो खत्म होना ही था... बंगाल उस डर के माहौल से आज़ाद हुआ है। अब, सुवेंदु जी के नेतृत्व में घोषणापत्र के वादों के मुताबिक तेज़ी से काम शुरू हो गया है..."
ममता बनर्जी की पार्टी के राज्यसभा में 10 सांसद हैं, जबकि लोकसभा में उनके 28 सांसद हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी के सांसदों और विधायकों को एकजुट रखने में नाकाम रही हैं। बता दें कि ममता बनर्जी की पार्टी से विधानसभा में 80 विधायक जीते थे, जिनमें से 58 ने अलग गुट बना लिया है और बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है। 
-Legend News

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