कभी करीब 20 हजार सैनिकों को आदेश देना वाला अफगानिस्तान का जनरल अब अमेरिका में कैब चलाता है। समय चक्र यही है। अफगानिस्तान सेना के पूर्व जनरल हैबतुल्लाह अलीजई जिन्होंने 2021 में तालिबान के कब्जे को रोकने की आखिरी कोशिश की थी अब अमेरिका में शरण मिलने के बाद वॉशिंगटन में उबर कैब चलाते हैं। CBS के शो 'फेस द नेशन' में मार्गरेट ब्रेनन के साथ एक इंटरव्यू में अलीजई ने अफगानिस्तान में अपने आखिरी दिनों और अमेरिकी सेना की तरफ से उन्हें वहां से निकाले जाने और अमेरिका में एक प्रवासी के तौर पर अपनी जिंदगी के बारे में बात की है।
अफगानिस्तान सेना के आखिरी चीफ ऑफ स्टाफ अलीजई को अगस्त 2021 में काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान छोड़ना पड़ा था। उन्हें अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से निकालकर अपने साथ वॉशिंगटन ले गये थे। 2021 में वह तालिबान के खिलाफ प्रतिरोध बनाने की कोशिश कर रहे थे तभी अमेरिकी कर्मियों ने उन्हें बताया कि बेस बंद किया जा रहा है और सभी को कुछ ही मिनटों में वहां से निकलना होगा। 
तालिबान के खिलाफ जंग लड़ने वाले अफगान जनरल बने ड्राइवर
हैबतुल्लाह अलीजई ने बताया कि अगस्त 2021 में जब तालिबान काबुल की तरफ बढ़ रहा था तब वे आम कपड़ों में अमेरिकी सेना के C-17 विमान में सवार हुए जबकि उन्हें शुरू में यह नहीं पता था कि उन्हें कहां ले जाया जा रहा है। काबुल से उड़ान भरने के बाद विमान कुवैत में उतरा। बाद में अलीजई को अमेरिका में शरण मिली जहां उन्होंने अपनी नई जिंदगी को एक प्रवासी की जिंदगी बताया। उन्होंने कहा कि बैकग्राउंड की गहन जांच और दूसरी प्रक्रियाओं की वजह से नौकरी मिलना मुश्किल था। अब वे वॉशिंगटन डीसी में उबर के लिए गाड़ी चलाते हैं। 
पूर्व जनरल अपनी पत्नी और तीन बेटों से भी अलग रह रहे हैं जिन्हें भारत में शरण मिली हुई है। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका से बाहर यात्रा नहीं कर सकते और उन्हें नहीं पता कि वे अपने परिवार से दोबारा कब मिल पाएंगे। अमेरिका के साथ अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए अलीजई ने कहा कि अफगान और अमेरिकी सैनिकों ने दो दशकों की लड़ाई में 'एक साथ खून बहाया' है। तालिबान के कब्जे और अफगान सरकार के गिरने के बावजूद उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी उम्मीद है। 
आनन फानन में छोड़ना पड़ा था अफगानिस्तान
अलीजई ने अफगानिस्तान में अपने आखिरी दिन काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी सेना के साथ काम करते हुए बिताए थे। जब वहां अफरा-तफरी के बीच लोगों को निकाला जा रहा था। उन्होंने बताया कि अफगान इंटेलिजेंस ने 26 अगस्त को हुए उस आत्मघाती हमले से पहले जिसमें 170 अफगान और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे 22 या 23 अगस्त के आसपास इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) के हमले की चेतावनी दी थी। पीछे मुड़कर देखते हुए अलीजई ने कहा कि वे 20 साल की अमेरिकी-अफगान सैन्य साझेदारी को सार्थक मानते हैं क्योंकि अमेरिका की जमीन पर आतंकवादी हमलों को रोकना इसके मुख्य उद्देश्यों में से एक था। 
-Legend News

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