हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गढ़वाल रेंज में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए हमेशा की तरह 01 जून से खुल गई है। 
अब यह अक्टूबर तक देश दुनिया के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। यह घाटी उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में है, जो समुद्रतल से 3962 मीटर की ऊँचाई पर स्थित फूलों की घाटी 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल फूलों की घाटी नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व में आती है। उत्तराखंड के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार फूलों की घाटी पहुंचने में सैलानियों को कोई दिक्कत नहीं होगी। सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। गेंदा, आर्किड सहित 300 से ज्यादा तरह के फूलों का दीदार हो सकता है। कुछ अविश्वसनीय फूलों के साथ हिमालयीय वनौषधियां देखी जा सकती हैं। रंग-बिरंगी तितलियां, चिडिय़ों का झुंड और जानवर भी यहां रहते हैं। जावलकर ने बताया कि फूलों की घाटी अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहेगी। 
दुर्लभ वनस्पतियां, ब्रह्म कमल आकर्षण
फूलों की घाटी दुर्लभ हिमालयीय वनस्पतियों से समृद्ध है। यहां फूलों की 300 से अधिक प्रजातियां पाईं जाती हैं,। इनमें एनीमोन, जेरेनियम, प्राइमुलस, ब्लू पोस्पी और ब्लूबेल प्रमुख हैं। पर्यटकों के लिए खास आकर्षण खूबसूरत ब्रह्म कमल फूल है। ब्रह्म कमल उत्तराखंड का राज्य फूल भी कहा जाता है। फूलों की घाटी ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पतिशास्त्री फ्रैंक एस. स्मिथ ने 1931 में खोजी थी।
घाटी में 17 किमी लंबा ट्रैक
फूलों की घाटी को 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। घाटी में सत्रह किलो मीटर लंबा ट्रैक है। यह ट्रैक 10 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित घांघरिया से शुरू होता है। जोशीमठ के पास एक छोटी-सी बस्ती गोविंदघाट से ट्रैक के जरिए पहुंचा जा सकता है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान की ओर से घाटी में ऑफलाइन माध्यम से प्रवेश मिलता है। 
जैव विविधता का अनुपम खजाना
पर्यटन सचिव जावलकर ने कहा कि फूलों की घाटी जैव विविधता का अनुपम खजाना है। प्रकृति प्रेमियों और साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए फूलों की घाटी पसंदीदा जगहों में से एक है। घाटी में आने वाले पर्यटकों का स्वागत करने के लिए राज्य पूरी तरह से तैयार है।
-Compiled by Legend News

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