देश की सियासत में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को सफल बता रहे हैं और सर्वसम्मति से पास दिल्ली डिक्लेरेशन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना कर रहे हैं।
राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कहा है, मुझे लगता ​​है कि इतने अलग-अलग तरह के देशों का एक ऐसा समूह बन गया है कि कोई विशेष प्रस्ताव रखना मुश्किल है। 
बिना विवाद के प्रस्ताव सरकार की बड़ी उपलब्धि 
कपिल सिब्बल के मुताबिक इसलिए मैंने शुरू में ही कहा कि यही अपने आप में एक बड़ी उपब्धि है, हमारे देश के द्वारा एक प्रस्ताव रखा गया और उसपर कोई विवाद नहीं हुआ। 
अमेरिका के खिलाफ बोलेंगे तो आतंकवाद बढ़ेगा 
विपक्षी सांसद ने कहा कि 'अब मुद्दा ये है कि जैसा कि हमने घोषणा की है, जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है। यह किसी के खिलाफ हो भी नहीं सकता।'
कपिल सिब्बल के मुताबिक अगर अमेरिका के खिलाफ बोलेंगे तो आतंकवाद बढ़ जाएगा।
हम रूस से भी खुद को दूर नहीं कर सकते, उसके साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी है और हम रूसी डिफेंस सिस्टम पर निर्भर हैं, इसलिए हम रूस से भी अलग हो नहीं सकते।
चीन इतना प्रभावी है कि जो चीन कहेगा उससे इंकार भी नहीं कर सकते, लेकिन हां भी नहीं कर सकते। 
ब्रिक्स की सफलता पर बदले मोदी विरोधियों के सुर
कपिल सिब्बल विपक्ष के दूसरे ऐसे नेता हैं, जिन्होंने पहली बार इस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की सफलता को खुलकर स्वीकार किया है। आमतौर पर ये मोदी सरकार की नीतियों के कटु आलोचक रहे हैं। इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी अप्रत्याशित रूप से भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए ब्रिक्स समिट में सर्वसम्मति से लगी संयुक्त घोषणापत्र पर वाहवाही की और इसे मोदी सरकार की बड़ी कामयाबी बताया। 
-Legend News

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