वृंदावन। श्री रामानुज संप्रदाय के प्रसिद्ध दिव्यदेश श्री रंगनाथ मंदिर का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव 7 मार्च से विविध धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के साथ वैदिक परंपरानुसार आयोजित किया जा रहा है। ब्रज के अनूठे उत्सव को लेकर मंदिर प्रबंधन द्वारा दिव्याकर्षक तैयारियां की जा रही है।  

इस संबंध में गुरुवार को मंदिर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में स्वामी रघुनाथ आचार्य ने बताया कि श्री रामानुज संप्रदाय की श्री वैष्णवीय परंपरा के प्रमुख दिव्यदेश श्री रंगनाथ मंदिर में वैसे तो प्रतिदिन मंगल उत्सवों की श्रंखला अनवरत रूप से जारी रहती है लेकिन इनमें सबसे प्रमुख ब्रह्मोत्सव है। ब्रह्मोत्सव रथ का मेला का शुभारंभ अंकुरारोपण, देव आह्वान, ध्वजारोहण से होता है जिसमें दक्षिण भारतीय वेदपाठी विद्वान वेदमंत्रों से गणपति और देवगणों का आव्हान करते हैं। मंदिर के प्रबंधक श्री कृष्णन जी ने बताया प्रथम दिवस 7 मार्च को प्रातः काल ठाकुर रंगनाथ भगवान स्वर्ण निर्मित पूर्ण कोठी में विराजित होकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे। 

इसी क्रम में ठाकुर गोदारंगमन्नार भगवान प्रतिदिन स्वर्ण रजत निर्मित वाहन सूर्यप्रभा,चंद्रप्रभा, गरुण जी, हनुमान जी, पालकी, सिंह, अश्व, सिंह, शार्दुल पर विराजित होकर दर्शन देते हैं। मंदिर की CEO अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि 12 मार्च को भगवान गोदा रंगमन्नार भगवान कांच के विमान में विराजमान होकर भक्तों के साथ होली खेलेंगे। मुख्य आकर्षण विशालकाय चंदन निर्मित रथ है जिसमें 13 मार्च को भगवान श्री रंगनाथ श्री देवी और भूदेवी के साथ विराजित होकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे। 

14 मार्च को भव्य आतिशबाजी का आयोजन श्री रंग जी के बड़े बगीचा में किया जाएगा। दिव्य महोत्सव का समापन 16 मार्च को अद्वितीय पुष्पक विमान से होगा। तदोपरांत स्वर्ण स्तंभ पर विराजित भगवान के प्रमुख वाहन गरुण जी को वेद मंत्रों से विदाई दी जाती है। 

श्री ब्रह्मोत्सव के बारे में कहा जाता है कि इसे स्वयं ब्रह्मा जी ने लोक कल्याण की भावना से श्री  भगवान के प्रमुख उत्सव के रूप में बनाया था।

- Legend News

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