अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच ट्रेड डील न होने को लेकर बड़ा दावा किया है। एक इंटरव्यू में लुटनिक ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता इसलिए नहीं हो सका क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। लुटनिक ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद इस डील को तैयार किया था। सब कुछ सेट था लेकिन इसके लिए मोदी का राष्ट्रपति ट्रंप को फोन करना जरूरी था। उन्होंने फोन नहीं किया और ये नहीं हुआ। लुटनिक का बयान इस बात का संकेत है कि डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि पीएम मोदी उनसे झुककर बात करें।
लेकिन अगर लुटनिक का दावा सच माने तो सवाल उठता है कि क्या दो दिन पहले ट्रंप ने जो कहा था वह झूठ था। 6 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप ने बयान दिया था प्रधानमंत्री मोदी उनसे मिलना चाहते थे और उन्होंने (मोदी) पूछा था कि 'सर, प्लीज क्या मैं आपसे मिल सकता हूं।' ट्रंप ने आगे बताया कि उन्होंने हां कहा क्योंकि उनके मोदी के साथ अच्छे रिश्ते हैं।' 
भारत के खिलाफ कहानी बना रहा अमेरिका
एक्सपर्ट का मानना है कि अमेरिका इस तरह के परस्पर विरोधी बयानबाजी और कहानी से लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा करके अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की तरकीब अपना रहा है लेकिन उसे नाकामी मिल रही है। हॉवर्ड लुटनिक का यह कहना कि अमेरिका और भारत के बीच डील पीएम मोदी के फोन न करने की वजह से रुक गई, यह उतना ही सही है जितना अमेरिका का यह कहना कि उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को ड्रग तस्करी गैंग चलाने के लिए पकड़ा है। 
अमेरिका की बौखलाहट की असली वजह
असल में अमेरिका के बार-बार डील से पीछे हटने की वजह डोनाल्ड ट्रंप की वह मांग है जिसे भारत पूरा करने की तो बात छोड़िए सुनने को भी तैयार है। ट्रंप प्रशासन भारत के कृषि क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलने को कह रहा है। इसमें कृषि उपकरणों के साथ ही अमेरिकी कृषि उत्पादों दाल, मक्का और डेयरी उत्पाद के लिए भारतीय बाजारों को खोलने की मांग शामिल है। इसमें अमेरिकी जीएम फसलों के लिए एंट्री मांगी जा रही है। 
भारत ने साफ कर दिया है कि वह कृषि और डेयरी क्षेत्र को खोलने के लिए तैयार नहीं है। यह भारतीय किसानों के लिए आत्मघाती कदम होगा। भारत के इनकार के बाद से अमेरिका बौखलाया हुआ है और हर तरीके से दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट पीएम मोदी के ट्रंप को फोन न करने के पीछे मजबूत वजह मानते हैं। 
ट्रंप से बात न करना कितना सही?
पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने लुटनिक के बयान को शेयर करते हुए लिखा, क्या यह हैरानी की बात है? नहीं। ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत में दो दिक्कत हैं-
1- उनकी अजीब और अप्रत्याशित मांगे, जो आर्थिक फायदे और ट्रंप के ईगो को खुश करने पर टिकी हैं।
2- सब कुछ आखिरकार पब्लिक हो जाता है। 
भारत को जानबूझकर दूर धकेलने की चाल
सौरव झा अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हैं और उन्होंने ट्रेड डील न होने के पीछे एक नए समीकरण की तरफ इशारा किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, पिछले 20 सालों से गेम यह था कि भारत को अमेरिका की तरफ धकेला जाए और रूस को चीन की तरफ। अब स्क्रिप्ट शायद पलट गई है। इसका उल्टा करने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका सरकार भारत से संबंध तोड़ने की धमकी दे रही है, जबकि विटकॉफ (ट्रंप के विशेष दूत) रूस को डील का लालच दे रहे हैं। 
इसके साथ ही सौरव झा अमेरिका और चीन की समानांतर वर्ल्ड ऑर्डर वाली व्यवस्था की तरफ भी इशारा करते हैं जिसे G2 कहा जाता है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने तीन संभावनाओं की तरफ इशारा किया है
1- भारत-अमेरिका ट्रेड डील तैयार है लेकिन साइन नहीं हुई है क्योंकि जब तक रूसी युद्ध खत्म नहीं करते, यूरोप के पास वीटो पावर है।
2- अमेरिका भारत को अपनी जागीर बनाने की आखिरी कोशिश कर रहा है। (इसकी मध्यम संभावा है और यह प्लान C की कोशिश है)
3- अमेरिका-चीन G2 शतरंज का बोर्ड बना रहे जिससे खिलाड़ियों को हटाने की कोशिश हो रही है। (इसकी ज्यादा संभावना है) 
-Legend News

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