फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में संशोधन वाले विधेयक को लेकर एक अमेरिकी सांसद राइली मूर ने जिस तरह से भड़ास निकाली, पहले समझ में नहीं आया। लेकिन, उनकी इस भड़ास को कुछ संदिग्ध यूरोपीय संगठनों ने जिस तरह से हाथों-हाथ लिया उससे बहुत बड़े भारत-विरोधी एजेंडे का खुलासा हो रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस सदस्य रोमन कैथोलिक राइली मूर ने पहले एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि भारतीय संसद एफसीआरए नियमों में संशोधन पर विचार कर रही है, ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर कब्जा कर सके। 
'कैथोलिक एरेना' को लगी मिर्ची
उनके इन दावों को आयरलैंड से चलने वाले कैथोलिक एरेना नाम के एक एक्स हैंडल ने हाथों-हाथ लिया। उसने राइली मूर के पोस्ट पर जो दावा किया है, उससे भारत-विरोधी पश्चिमी एजेंडे का पर्दाफाश हो रहा है। कैथोलिक एरेना लिखता है, 'इसपर बोलने के लिए राइली मूर को धन्यवाद।' इसने इस मुद्दे पर संभावित कमेंट को लेकर उन्हें चेताया भी है, लेकिन भारत-विरोधी अपनी मानसिकता भी उजागर कर दिया है। 
एफसीआरए पर धमकाने की कोशिश
इससे पहले राइली मूर ने अपने पोस्ट में संभावित एफसीआर बिल को लेकर आरोप लगाया था, 'यह ईसाइयों के खिलाफ स्पष्ट हमला है। अगर यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ा तो इससे भारत के साथ हमारे द्विपक्षी संबंधों पर बड़ा असर पड़ेगा।' 
अमेरिका और पश्चिम को भारतीयों का करार जवाब
राइली मूर के आरोपों वाली खबर पर हमारे टाइम्स न्यूज नेटवर्क के यूजर्स ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है, उससे भारत के मूड का अंदाजा लगाया जा सकता है। हम यहां अपने कुछ यूजर का कमेंट शेयर कर रहे हैं-
एक यूजर ने लिखा है, 'अमेरिका को सबसे ज्यादा बुरा लग रहा है, इसका मतलब साफ है कि अमेरिका फंडिंग कर कर भारत में अस्थिरता फैलता है और आतंकवाद को सपोर्ट करता है।'
इसी तरह से एक और यूजर का कहना है, 'एफसीआरए बिल को लेकर अमेरिका को इतना क्यों नाराज होना चाहिए? यह इसलिए क्योंकि इससे भारत में अमेरिका की दखल देने की क्षमता कम हो जाएगी।'
एक अन्य यूजर लिखते हैं, 'कुछ तो गड़बड़ है,दया कुछ तो गड़बड़ है,जो इतनी बुरी तरह से इनके पेट में मरोड़ शुरू हुई है।'
कोई यह लिखता है कि 'तीर एकदम निशाने पर लगा है..।'
एक अन्य कमेंट है,'अमेरिका एनजीओ को फंडिंग करके अपने हित साधता है, यह पूरी दुनिया को पता है। अगर ईसाई यहां दशकों से रहते हैं तो उन्हें बाहर की फंडिंग क्यों चाहिए? यहां के ईसाई खुद ही कमा, खा रहे हैं तो वो खुद भी फंडिंग कर सकते हैं। दूसरे देश के फंड की जरूरत नहीं।'
इसी तरह से एक अन्य यूजर ने साफ लिखा है, 'एफसीआर होना भारत के लिए बढ़िया चीज है। आखिरकार इससे भारतीय समाज में दशकों पुराना अमेरिकी और पश्चिमी दखल खत्म होगा, जो धर्म की आड़ में समाज को बिगाड़ता है, डेमोग्राफिक बदलाव करता है और धार्मिक संस्थाओं और संदिग्ध एनजीओ के माध्यम से अरबों डॉलर झोंककर सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ देता है।' 
-Legend News 

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