मथुरा। मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण में नवागत सचिव के तल्ख तेवरों का असर दिखाई देने लगा है। समय की पाबंदी के साथ-साथ लंबित मामलों पर भी एक्शन दिखाई दे रहा है। लोक आयुक्त के हीलाहवाली वाले रवैये से भी सचिव नाराज हैं। 

इसके अलावा शिकायतकर्ता की एक पत्रावली निकालने वाले लिपिक को विभाग में देर से आने पर निलंबित कर दिया है। दूसरी ओर विभाग के अधीनस्थ कार्मिकों को दलालों से दूरी बनाकर रखने तथा जनता की बात सीधे सुनने के फरमान दिए गए हैं।

ज्ञात हो कि लोक आयुक्त के सचिव डॉ. रीमा बंसल ने आयुक्त को दिनांक 1 अगस्त को पत्र लिखकर आरटीआई कार्यकर्ता सुरेंद्र कुमार निवासी जिला सीतापुर के जवाब पर 18 अगस्त तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसमें भी आयुक्त कार्यालय से कलाकारी कर दी गई। आयुक्त के पत्र में स्पष्ट लिखा है कि शिकायती पत्र में दिए बिंदुओं पर जनपद के बाह्य अधिकारियों की टीम से जांच कराकर आख्या प्रस्तुत की जाए, लेकिन अपर आयुक्त द्वारा सचिव एमवीडीए को  जारी पत्र में जांच आख्या दल से कराकर मांग ली। इसी का लाभ उठा निवर्तमान सचिव अरविंद कुमार द्विवेदी ने एमवीडीए की शिकायत को एमवीडीए के अधीनस्थों से ही कराना अपने हित में समझा। 

निवर्तमान सचिव एमवीडीए अरविंद कुमार द्विवेदी ने 29.9.25 को पत्र जारी कर आरटीआई कार्यकर्ता की जांच पर आख्या तीन दिन में मांगी। इस तरह जांच रिपोर्ट तीन अक्तूबर तक प्रस्तुत होनी थी। इसके बावजूद भी जांच रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हो सकी है। 

विभागीय सूत्र बताते हैं कि एमवीडीए में जिस शिकायती पत्र की जांच होनी है, उसमें विभाग की कमियां उजागर हो सकती हैं। 29 पेजों का उल्लेख किया जाना संभव नहीं हैं, फिर भी शिकायत में बिल्डरों पर बकाया 200 करोड़ न वसूलने से होने वाली शासन को वित्तीय क्षति, अवैध निर्माणों पर की जाने वाली विधिक कार्यवाही के साथ अर्थदण्ड की वसूली, अशोका हाइट्स के नाले पर बने होने के बाद भी विभागीय कार्यवाही का न होना आदि शामिल है। 

विभाग में आउट सोर्स कार्मिक श्याम द्वारा सिविल लाइंस में किए गए बिना नक्शा पास के दो मंजिला मकान बनाकर रहने का प्रकरण भी शामिल किया गया है। शिकायत कर्ता का यह भी कहना है कि यह मकान नाले पर अतिक्रमण करके बनाया गया है। 

वहीं गत दिवस किसी शिकायतकर्ता की पत्रावली न मिलने के चलते खोजे गए प्रवर्तन के लिपिक धर्मेंद्र को अनुपस्थिति के चलते विप्रा के उपाध्यक्ष ने निलंबित कर दिया। 

बताते हैं कि लिपिक धर्मेंद्र का भी शिकायतों को दबाने में हाथ रहा है। आयुक्त के पत्र पर जांच आख्या के संबंध में सचिव आशीष कुमार सिंह ने बताया कि निवर्तमान सचिव द्वारा जांच गठित की गई थी, लेकिन ओएसडी का स्थानांतरण होने के चलते इसे नये सिरे से गठित कर जांच आख्या शीघ्र भेजी जाएगी। शासन के आदेशों का शतप्रतिशत अनुपालन किया जाएगा।
- Legend News

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