मथुरा। श्रीकृष्ण-जन्मभूमि के सिद्ध लीलामंच पर भक्ति, विश्वास एवं समर्पण की अलौकिक धाराओं की त्रिवेणी के रूप में ‘भक्त मीराबाई लीला’ की प्रस्तुति की।

विश्वप्रसिद्ध रासाचार्य स्वामी श्री देवकीनन्दन जी महाराज के द्वारा प्रस्तुत की गयी भक्त मीराबाई लीला में पात्रों ने अपने उत्कृष्ट भाव, सुमधुर भजन एवं सजीव संवादों के माध्यम से भक्त मीराबाई के त्याग, संघर्ष और अटूट कृष्णप्रेम को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि सभी उपस्थित श्रद्धालु राधे-राधे के साथ भक्त मीरा के  भी जयकारे लगाने लगे।

भक्त मीराबाई के बाल्यकाल की लीला प्रसंग ने भक्तों को भावुक कर दिया। चार वर्ष की उम्र में ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निश्छल प्रेम, संपूर्ण समर्पण का भाव एवं कृष्ण के लिए प्रगाढ़ भक्ति ने मीरा के चरित्र को विश‍िष्ट बना दिया।  ‘‘मेरो तो गिरधर गोपाल, दूसरों न कोई’’ भक्त मीराबाई का मात्र एक भजन नहीं है अपितु यह इनके शुद्ध शरणागत भाव की अभिव्यक्ति है। महलों को त्यागकर ब्रज के वन-उपवन एवं लीला स्थलों में अपने प्रियतम श्रीकृष्ण को खोजना सहज नहीं था, किन्तु कृष्ण प्रेम में दीवानी भक्त मीरा बाई ने भक्ति, वैराग्य के अविश्वसनीय त्याग और दृढ़-संकल्प से ठाकुरजी के प्रति अपने प्रेम को जीवंत किया। जीव गोस्वामी जी महाराज एवं भक्त मीराबाई के परस्पर सत्संग और संवाद ने ब्रज भाव को अनूठे तरीके से स्पष्ट किया है। उसी का प्रभाव है कि आज अनेकों संत गोपी रूप में श्रीठाकुरजी की कृपा प्राप्ति के लिए तत्पर हैं।

श्रीकृष्ण-जन्मस्थान के सिद्ध लीलामंच पर संध्या-बेला में आयोजित भक्त मीराबाई लीला दर्शन में, भक्त मीराबाई का जीवन्त चरित्र और बड़े ही सजीव एवं भावुक रूप में प्रस्तुत किया गया। मीराबाई के बाल्यकाल में कृष्ण को पति रूप में स्वीकार करना, मेवाड़ के राजा के द्वारा प्रताड़ना सहना, विष के प्याले को अमृत-कलश में परिवर्तित होना और अन्त में प्रकाश रूप में भगवान द्वारिकाधीष के श्रीविग्रह में विलीन होने के प्रसंग को लीला के माध्यम से भक्तों को दर्शन कराये गये।

संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा एवं सदस्य श्री गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण लीला कोई मनोरंजन के लिए नाटक नहीं है, अपितु श्रृद्धा और भाव से श्रीकृश्ण लीलाओं के दर्शन कृष्ण  की प्राप्ति का एक सहज मार्ग है।  इस प्रकार की श्रीकृष्ण लीलाओं में ठाकुरजी के भक्तों के प्रसंगों के दर्षन मात्र से कृष्ण-कृपा की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही साथ ऐसे प्रसंग सनातन के विश‍िष्ट भाव, त्याग और प्रेम से भी साक्षात्कार कराते हैं। 

लीलाओं की व्यवस्थाओं में संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य डॉ.  रोशन लाल एवं श्रीकृष्ण लीला मण्डल के श्री मुकेश खण्डेलवाल एडवोकेट, श्री कन्हैया लाल रंग वाले, श्री ब्रजकिशोर घी वाले, श्री महेश चन्द्र प्रेसवाले, श्री अनिलभाई ड्रेसवाले, श्री गौरव अग्रवाल एवं श्री राजीव गुप्ता सहित सभी भावुक सदस्यगण का विशेष सहयोग रहा।
- Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).