भारत सरकार ने कपड़ा उद्योग को मजबूती देने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है, जिसका नाम ‘डिस्ट्रिक्ट-लेड टेक्सटाइल्स ट्रांसफॉर्मेशन’ (डीएलटीटी) रखा गया है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य वस्त्र क्षेत्र में समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना है।
100 जिलों को वैश्विक निर्यात चैंपियन बनाने का लक्ष्य
इस पहल के तहत सरकार ने देश के 100 अधिक संभावनाओं वाले जिलों को वैश्विक वस्त्र निर्यात चैंपियन बनाने और 100 अति संभावनाओं वाले जिलों को आत्मनिर्भर वस्त्र केंद्रों के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है।
जिला स्तर पर केंद्रित होगी वस्त्र नीति
असम के गुवाहाटी में आयोजित राष्ट्रीय वस्त्र मंत्री सम्मेलन में वस्त्र मंत्रालय ने बताया कि अब वस्त्र क्षेत्र में जिला स्तर और विशेष क्षेत्र आधारित रणनीति के तहत काम किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों का आंकड़ों पर आधारित मूल्यांकन किया गया है।
तीन प्रमुख मानकों पर हुआ मूल्यांकन
मंत्रालय के अनुसार इस अध्ययन में तीन मुख्य मानकों- निर्यात प्रदर्शन, एमएसएमई की स्थिति और कुशल कामगारों की उपलब्धता- को आधार बनाया गया। इसी मूल्यांकन के आधार पर जिलों की श्रेणियां तय की गई हैं।
चैंपियन और आकांक्षी जिलों में वर्गीकरण
अध्ययन के बाद जिलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है- चैंपियन जिले और आकांक्षी जिले। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग योजनाएं और कार्य रूपरेखा तैयार की गई हैं, ताकि संबंधित जिलों का विकास उनकी जरूरतों के अनुरूप हो सके।
पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत पर विशेष फोकस
इस पहल में पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन क्षेत्रों में जनजातीय इलाकों के विकास, संपर्क सुविधाओं के विस्तार और जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों को मिलेगा वैश्विक मंच
सरकार का कहना है कि जीआई टैग के माध्यम से उत्तर-पूर्व और अन्य क्षेत्रों के पारंपरिक हस्तशिल्प और विशिष्ट वस्त्र उत्पादों को वैश्विक बाजार में अलग पहचान दिलाई जाएगी, जिससे स्थानीय कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार, उद्योग और शिक्षा संस्थानों में सहयोग
इस योजना के तहत सरकारी संसाधनों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि वस्त्र क्लस्टरों को मजबूत किया जाए और सफल मॉडलों को अन्य जिलों में भी लागू किया जा सके।
उत्तर-पूर्व में वस्त्र विकास पर उच्चस्तरीय मंथन
वस्त्र मंत्रालय ने गुवाहाटी में एक उच्चस्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें उत्तर-पूर्व राज्यों में वस्त्र क्षेत्र के विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में नीतिगत तालमेल, निवेश आकर्षित करने, कौशल विकास और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर विचार हुआ।
गिरिराज सिंह ने कहा उत्तर-पूर्व वस्त्र क्षेत्र का अहम हिस्सा  
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि उत्तर-पूर्व भारत देश के वस्त्र क्षेत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है और सरकार इसके समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
हथकरघा, रेशम और महिला कारीगर बनीं ताकत
विचार-विमर्श के दौरान उत्तर-पूर्व की हथकरघा परंपरा, जीआई टैग वाले उत्पाद, विभिन्न प्रकार के रेशम, बांस से बने उत्पाद और महिला कारीगरों की व्यापक भागीदारी को इस क्षेत्र की प्रमुख ताकत के रूप में रेखांकित किया गया। 
-Legend News

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