रिपोर्ट : LegendNews
बड़ी सूरमा कुंज में श्रीगौड़ीय वैष्णवाचार्य श्रीहरिदास महाराज का निकुंज गमन महोत्सव सम्पन्न
वृन्दावन। पत्थरपुरा स्थित श्रील कृष्णदास कविराज गोस्वामी पाद की भजन स्थली बड़ी सूरमा कुंज में चल रहा श्रीगौड़ीय वैष्णवाचार्य श्रीहरिदास महाराज का दस दिवसीय नित्य निकुंज गमन महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर प्रातः काल सन्तों व भक्तों द्वारा श्रीहरि नाम संकीर्तन किया गया।साथ ही महंतों व महामण्डलेश्वरों का समाराधन हुआ।
महोत्सव में ब्रज रसिक संत श्रीमहंत प्रेमदास शास्त्री महाराज ने समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि हमारे पूज्य सदगुरुदेव श्रीहरिदास महाराज परम् भजनानंदी व निस्पृह संत थे।उन्हें ब्रज वृन्दावन, सन्त, गौ व ब्रजवासियों से अनन्य प्रेम था।वे इन सभी में प्रभु का दर्शन करते थे।हम बडभागी हैं, जो वे हमें सदगुरुदेव के रूप में प्राप्त हुए।
प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि निकुंजवासी श्रीगौड़ीय वैष्णवाचार्य श्रीहरिदास जी महाराज के संस्कार ब्रज रसिक संत श्रीमहंत प्रेमदास शास्त्री महाराज को विरासत में मिले हैं। इसीलिए वे अत्यंत वीतराग, निस्पृह व असंपरक्त जीवन जी रहे हैं। वे न कभी श्रीधाम वृन्दावन से बाहर जाते हैं, न कभी पैरो में जूते-चप्पल पहनते हैं, न कभी किसी सवारी में बैठते है। रुपयों व पैसों को भी स्पर्श न करने का उन्होंने संकल्प लिया हुआ है। ऐसे संत आज के समय में कहाँ हैं। उन जैसी पुण्यआत्माओं का तो अब युग ही समाप्त होता चला जा रहा है।
कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद शास्त्री महाराज, महामंडलेश्वर डॉ. आदित्यानंद गिरि महाराज, महंत सुन्दर दास महाराज, महंत जगन्नाथानंद महाराज, आचार्य जय किशोर गोस्वामी, महंत मोहिनी शरण महाराज, आचार्य भूति कृष्ण महाराज (श्रीशुकाचार्य पीठ), सन्त अनुज गोपाल शास्त्री, महंत गौर गोपाल दास महाराज, महंत परमेश्वर दास महाराज, महंत रसराज दास महाराज, सन्त अच्युतानंद दास शास्त्री महाराज, आचार्य गोपाल भैया महाराज, डॉ. राधाकांत शर्मा, सन्त माधव दास महाराज, बाबा सन्त दास महाराज, भागवताचार्य किशोरी चरण दास, परमानंद दास महाराज, हरिचरण दास महाराज, पण्डित द्वारिका प्रसाद आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। महोत्सव का समापन सन्त, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।जिसमें असंख्य व्यक्तियों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
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