लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी देने वाली अनुकंपा नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. अब फर्जीवाड़ा और देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी. सरकार ने मृतक आश्रित सेवायोजन मॉड्यूल शुरू कर दिया है, जो मानव सम्पदा पोर्टल पर काम करेगा. इस नई व्यवस्था से आश्रितों को घर बैठे आसानी से आवेदन करने की सुविधा मिलेगी. पहले यह प्रक्रिया ऑफिसों में फाइलों के चक्कर में फंस जाती थी. कई बार फर्जी दस्तावेज और सिफारिशों के चलते गलत लोगों को लाभ मिल जाता था. अब सब कुछ पारदर्शी और समयबद्ध होगा.

शासनादेश के अनुसार, आश्रितों को अब www.ehrms.upsdc.gov.in पर लॉगिन करना होगा. होम पेज पर ‘DDCA System’ लिंक पर क्लिक करने से मृतक आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का पेज खुलेगा. यहां कई टैब्स है. दिशा-निर्देश, शासनादेश, पंजीकरण, योग्यता विवरण, दस्तावेज विवरण, आवेदन प्रिंट और स्थिति जांच.

आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले ‘प्रार्थी पंजीकरण’ पर क्लिक करें. जरूरी जानकारी भरने के बाद सबमिट करें. आवेदक के मोबाइल पर OTP आएगा. OTP डालकर मृतक का नाम वेरिफाई करें. स्क्रीन पर परिवार की सूची दिखेगी. इसमें अपना नाम चुनें. अगर नाम नहीं है तो नाम, जन्म तिथि और मृतक से संबंध लिखें. OTP वेरिफिकेशन के बाद फॉर्म भरकर सबमिट करें. पंजीकरण पूरा होते ही पंजीकरण संख्या मिल जाएगी. इसके बाद योग्यता विवरण में शैक्षणिक योग्यता भरें. सावधानी से सारी डिटेल डालें क्योंकि एक बार आवेदन लॉक करने के बाद कोई बदलाव नहीं हो सकेगा. फिर डॉक्यूमेंट विवरण में जरूरी कागजात अपलोड करें.सभी चरण पूरे करने के बाद आवेदन लॉक कर दें. लॉक होने के बाद आवेदन पर विचार होगा. अनलॉक आवेदन रद्द माना जाएगा.

कार्यालयों की जिम्मेदारी: प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम देवराज ने बताया कि सरकार ने सभी विभागों और कार्यालयों के ऑफिस एडमिन को निर्देश दिया है कि वे अपने पोर्टल पर फर्स्ट लेवल, अप्रूविंग अथॉरिटी और ऑर्डर अथॉरिटी नामित करें. अगर यह काम नहीं किया गया तो उस कार्यालय के आश्रित आवेदन ही नहीं कर पाएंगे. मृतक के अंतिम कार्यालय में ही आवेदन जाएगा. यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश (सरकारी सेवक) मृतक आश्रित सेवायोजन नियमावली-1974 के तहत की गई है. इसका मकसद है कि पूरी प्रक्रिया सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध हो.अब फाइल घूमने की बजाय सब कुछ ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा. आश्रितों को उनका हक समय पर मिल सकेगा. पोर्टल पर आवेदन की स्थिति भी आसानी से देखी जा सकेगी.यह शासनादेश इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किया गया है.

आश्रित परिवारों को होगा फायदा: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरीकिशोर तिवारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था से लाखों आश्रित परिवारों को फायदा होगा. जो परिवार अचानक कमाने वाले सदस्य को खो देते हैं, उन्हें अब नौकरी पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. पूरी प्रक्रिया घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से पूरी हो जाएगी. उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम डिजिटल इंडिया और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. उम्मीद है कि जल्द ही सभी विभाग इस मॉड्यूल को पूरी तरह सक्रिय कर लेंगे और आश्रितों को लाभ मिलना शुरू हो जाएगा.

अनुकंपा नियुक्ति में हुए कुछ फर्जीवाड़े

बदायूं-मेरठ क्षेत्र में तथ्य छिपाकर अनुकंपा नौकरी पाने वाले शिक्षक-कर्मचारियों पर योगी सरकार ने सख्त एक्शन लिया था. पिछले साल बदायूं समेत कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने माता-पिता के सरकारी नौकरी में होने या अन्य तथ्य छिपाकर आश्रित के रूप में नौकरी ली थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन स्तर पर जांच शुरू हुई थी, जिससे सैकड़ों कर्मचारियों में खलबली मची हुई है. पिछले वर्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फ्रॉड से ली गई अनुकंपा नियुक्ति को कोई भी समय अवधि बचाती नहीं है. मिर्जापुर के एक शिक्षक कृष्ण कांत ने फर्जी दस्तावेज और तथ्यों को दबाकर 27 साल तक नौकरी की, लेकिन कोर्ट ने उसे आरंभ से ही अमान्य करार देते हुए बर्खास्तगी बरकरार रखी. 33 साल पहले अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले एक शिक्षक के मामले में जांच में फ्रॉड सामने आया था. अधिकारीयों ने पाया कि मृत्यु प्रमाण-पत्र या अन्य दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी. मामले की जांच जारी है और ऐसे पुराने मामलों की समीक्षा हो रही है.
- Legend News

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