केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में सीटें बढ़ाने और साल 2029 से महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे संविधान संशोधन बिल को लेकर विपक्षी खेमे में बड़ी हलचल मच गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के बाद अब 22 सांसदों वाली दक्षिण की बड़ी पार्टी डीएमके ने भी सरकार को समर्थन देने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। 
संसद में लोकसभा सीटों की संख्या का विस्तार करने और आगामी वर्ष 2029 के आम चुनावों से महिला आरक्षण कानून को जमीन पर उतारने के लिए लाए जाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा इस विधेयक को संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ पारित कराने की की जा रही पुरजोर कोशिशों के बीच अब चेन्नई से बड़ी खबर आ रही है। विपक्षी गठबंधन के एक बेहद मजबूत और बड़े घटक दल द्रमुक (DMK) के रुख में इस बिल को लेकर अप्रत्याशित नरमी देखने को मिली है।
​दक्षिण के राज्यों के हितों की रक्षा और भेदभाव न होने की मांगी गारंटी 
डीएमके ने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस बात की पक्की और पुख्ता लिखित गारंटी देती है कि परिसीमन की इस पूरी प्रक्रिया से तमिलनाडु और दूसरे किसी भी दक्षिणी राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व या हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, तो उनकी पार्टी आगे की औपचारिक बातचीत के लिए पूरी तरह से तैयार है। पार्टी का स्पष्ट तौर पर कहना है कि केंद्र सरकार को हर हाल में बिल के भीतर ही प्रत्येक राज्य का पक्का हिस्सा साफ कर देना चाहिए, जिससे क्षेत्रीय भेदभाव की कोई गुंजाइश ही न बचे।
दूसरी तरफ सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्ष के इस रुख को भांपते हुए सरकार इस बिल के आधिकारिक ड्राफ्ट में कुछ महत्वपूर्ण व्यावहारिक बदलाव भी कर सकती है। इसके तहत गृह मंत्री अमित शाह का एक लिखित आश्वासन भी जोड़ा जा सकता है, जिसमें देश के सभी राज्यों में एक समान रूप से 50 प्रतिशत लोकसभा सीटें बढ़ाए जाने की स्पष्ट बात कही जाएगी ताकि अनिर्णय की स्थिति में फंसे सांसदों को भरोसा दिलाया जा सके।
स्टालिन ने कांग्रेस पर साधा निशाना; 'इंडिया' गठबंधन को बर्बाद करने का लगाया आरोप और खुद फैसले लेने का किया एलान 
गौरतलब है कि बीते 16 अप्रैल को डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक रूप से परिसीमन बिल की कॉपी तक जलाकर इसका तीव्र विरोध दर्ज कराया था, लेकिन अब पार्टी के बदले हुए लहजे ने सबको चकित कर दिया है। इसके साथ ही डीएमके सूत्रों ने अपनी सहयोगी पार्टी कांग्रेस पर बेहद तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस की गलत रणनीतियों ने पूरे 'इंडिया' गठबंधन को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया है।
पार्टी सूत्रों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा हमारे पुरजोर समर्थन के बल पर ही सूबे में 5 सीटें जीतने के बाद उसने तुरंत टीवीके (TVK) से हाथ मिला लिया, लिहाजा अब उन्हें हमें किसी भी मुद्दे पर उपदेश देने की कोई जरूरत नहीं है। डीएमके ने पूरी तरह से स्टैंड साफ कर दिया है कि इस ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक के मामले में वह अब कांग्रेस के अगले रुख या फैसले का बिल्कुल भी इंतजार नहीं करेगी और राज्य के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए अपने सारे निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र होकर खुद ही लेगी। 
-Legend News

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