रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि जिस तरह आज भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्तता और एकीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है, उसी भावना को रक्षा लेखा विभाग के वित्तीय तंत्र में भी लागू करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाएं जब मिलकर काम कर रही हैं, तो उनके वित्तीय तंत्र भी एकीकृत हों, तो इससे पूरी रक्षा प्रबंधन व्यवस्था और अधिक प्रभावी और कुशल बन सकती है।
राजनाथ सिंह ने गुरुवार को रक्षा लेखा विभाग के 279वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रक्षा लेखा विभाग रक्षा मंत्रालय का एक ऐसा साझा सूत्र है, जिससे मंत्रालय के लगभग सभी काम किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। उन्होंने रक्षा लेखा विभाग को पूरे रक्षा तंत्र की रीढ़ बताया। राजनाथ सिंह ने कहा, ”पिछले वित्त वर्ष, यानी 2025-26 में हमारी जो व्यय बुकिंग रही है, वह लगभग 100 प्रतिशत रही है। यह आपके और तीनों सेवाओं के संयुक्त प्रयासों का बहुत ही बड़ा पड़ाव है, बहुत ही अच्छा उदाहरण है। यह उपलब्धि आपकी प्रतिबद्धता, आपकी कड़ी मेहनत, और आपकी कार्यकुशलता को दिखाती है। और मैं चाहूंगा कि इस वर्ष भी, आप उसी गति को बरकरार रखें, उसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ें।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अब बजट की शेष राशि केवल वार्षिक समीक्षा तक सीमित रहने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जिसमें किसी भी समय वित्तीय स्थिति की जानकारी मिल सके। उन्होंने रक्षा लेखा विभाग के 279वें स्थापना दिवस पर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा,  मैं आप सभी को, रक्षा लेखा विभाग के, 279वें स्थापना दिवस पर, शुभकामनाएं देता हूं। किसी भी संस्था के लिए, लगभग तीन शताब्दियों तक काम करते रहना, गौरव का विषय होता है। रक्षा लेखा विभाग की जो इतनी बड़ी विरासत है, उसको आप सबने न सिर्फ बनाए रखा है, बल्कि आगे बढ़ाने का भी काम किया है। इसके लिए, आप सभी बधाई के पात्र हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुणवत्ता लेखा-परीक्षण के क्षेत्र में देश और दुनिया में उपलब्ध बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता लेखा-परीक्षण के क्षेत्र में जो बेहतर कार्यप्रणालियां राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध हैं, उन्हें अपनाएं, उन्हें आत्मसात करें, अपने कार्य क्षेत्र में लागू करने का प्रयास करें, और देश-दुनिया के साथ आगे बढ़ें।
रक्षा मंत्री ने रक्षा लेखा विभाग में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने विभाग से ऐसी बातचीत आधारित एआई व्यवस्था तैयार करने का प्रयास करने को कहा, जिसमें संपर्क के अलग-अलग माध्यमों को जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें बातचीत, लघु संदेश, व्हाट्सऐप, ई-मेल और दूरभाष जैसे सभी माध्यम शामिल किए जा सकते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा, मेरा सुझाव है कि विभाग एक ‘बातचीत आधारित एआई व्यवस्था’ लाने का प्रयास करे, जिसमें संपर्क के सभी माध्यम शामिल हों-बातचीत, लघु संदेश, व्हाट्सऐप, ई-मेल, दूरभाष इत्यादि। 
उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू हो जाती है, तो इससे न केवल पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि पूरे विभाग की कार्यक्षमता भी एक नए स्तर तक पहुंच जाएगी।
उन्होंने कहा कि रक्षा लेखा विभाग ने स्पर्श के आंकड़ों की सफाई में पहले ही बड़ी सफलता हासिल की है। राजनाथ सिंह ने सुझाव दिया कि अब अगला कदम शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को स्वचालित बनाने का होना चाहिए। उन्होंने कहा, रक्षा लेखा विभाग ने स्पर्श के आंकड़ों की सफाई में पहले ही एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है। मैं सुझाव करूंगा कि अगला कदम शिकायत समाधान व्यवस्था को स्वचालित करने का होना चाहिए।
-Legend News

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