रिपोर्ट : LegendNews
ठाकुरश्री वंशीवट बिहारी गिरधारी लाल जू महाराज का वार्षिक महोत्सव धूमधाम से संपन्न
वृन्दावन। वंशीवट क्षेत्र स्थित संकीर्तन भवन में श्रीसंकीर्तन भवन धार्मिक न्यास ट्रस्ट (झूंसी) के तत्वावधान में चल रहा ठाकुरश्री वंशीवट बिहारी गिरधारी लाल जू महाराज का वार्षिक महोत्सव विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के मध्य अत्यंत श्रद्धा व धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।जिसके अंतर्गत ठाकुर विग्रहों को नए वस्त्र धारण कराए गए।साथ ही संतों व भक्तों के द्वारा उनका वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया।
इससे पूर्व प्रख्यात भागवत प्रवक्ता आचार्य गोपाल भैया महाराज ने अपनी सरस वाणी के द्वारा देश-विदेश से आए समस्त भक्तों-श्रद्धालुओं को ब्रह्मलीन संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज द्वारा रचित ग्रंथ "भागवत चरित" की कथा श्रवण कराई।इसके अलावा श्रीहनुमद् आराधन मण्डल (रजि.) के द्वारा सुन्दर काण्ड का संगीतमय सामूहिक पाठ किया गया।साथ ही श्रीहनुमानजी महाराज की आरती की गई।
इस अवसर पर आयोजित संत-विद्वत सम्मेलन में पुराणाचार्य डॉ. मनोज मोहन शास्त्री एवं भागवताचार्य सुरेश चन्द्र शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मलीन संत प्रवर प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज की श्रीधाम वृन्दावन, गौ एवं संतों के प्रति अपार निष्ठा थी।वे इनकी सेवा, रक्षा एवं उत्थान के लिए पूर्णत: समर्पित थे।उन जैसी पुण्यात्माएं ही हमें पृथ्वी पर ईश्वर के होने की अनुभूति कराती हैं।
प्रख्यात भागवताचार्य आचार्य गोपाल भैया महाराज एवं आचार्य विनय त्रिपाठी ने कहा कि हमारे सदगुरुदेव ब्रह्मलीन संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज समस्त धर्म ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे।उन्होंने वेदव्यासजी द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण का ब्रजभाषा में अनुवाद कर "श्रीभागवत चरित" नामक ग्रंथ की रचना की।इसीलिए वे व्यासावतार कहे जाते हैं।
प्रख्यात साहित्यकार "यूपी रत्न" डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं आचार्य विपिन बापू महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन प्रभुदत्त ब्रह्मचारी महाराज श्रीकृष्ण रसोपासना के रससिद्ध संत थे।उनकी ब्रज वृन्दावन, गिरिराज गोवर्धन एवं श्रीयमुना महारानी में अपार निष्ठा थी।
महोत्सव में आचार्य बुद्धि प्रकाश शास्त्री, आचार्य युगल किशोर कटारे, आचार्य नेत्रपाल शास्त्री, आचार्य मंगेश दुबे, आचार्य अनन्य देव उपाध्याय, "धर्म पथिक" आचार्य शैलेन्द्र कृष्ण शास्त्री, पण्डित श्याम सुन्दर ब्रजवासी,आध्यात्मिक पत्रकार डॉ. राधाकांत शर्मा, आचार्य राजेश कृष्ण शास्त्री, भूति कृष्ण महाराज (श्रीशुकाचार्य पीठ), महंत रामचन्द्र दास महाराज, निवासाचार्य महाराज, आचार्य मुकेश मोहन शास्त्री आदि के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।महोत्सव का समापन संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।
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