सिख सिद्धांतों और संस्थाओं को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में श्री अकाल तख्त से तलब किए जाने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान श्री अकाल तख्त सचिवालय पहुंचे। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री मान ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी भी अकाल तख्त को चुनौती नहीं दी और न ही ऐसा करने का उनका कोई इरादा है। उन्होंने कहा, “अकाल तख्त सर्वोच्च है और मैं एक विनम्र सिख के रूप में यहां आया हूं।” 
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने अपने बयानों और शिकायतों को लेकर लिखित स्पष्टीकरण जत्थेदार को सौंपा है। उनके अनुसार लगभग 25 हजार पन्नों की शिकायतें और साक्ष्य अकाल तख्त को दिए गए हैं, जिन्हें जांच के बाद परखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि लापता स्वरूपों के मामले की जांच के पीछे कोई राजनीति नहीं है। 
मुख्यमंत्री मान ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर भी पहली बार प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो फर्जी या एआई से तैयार किया गया है। उन्होंने जत्थेदार से कहा कि इसकी फॉरेंसिक जांच राज्य या देश की किसी भी प्रयोगशाला से कराई जा सकती है।
बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि मुलाकात से पहले सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक बातें फैलाई गईं, लेकिन उन्होंने कभी श्री अकाल तख्त की मर्यादा पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि वे श्री अकाल तख्त के फैसले का सम्मान करेंगे।
गौरतलब है कि 5 जनवरी को श्री अकाल तख्त के जत्थेदार ने मुख्यमंत्री को 15 जनवरी सुबह 10 बजे अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने के लिए तलब किया था। यह समन मुख्यमंत्री के पिछले आचरण को लेकर सिख सिद्धांतों और संस्थाओं के कथित अपमान से जुड़े आरोपों पर स्पष्टीकरण के लिए जारी किया गया था। 
-Legend News

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