पश्चिम बंगाल में भारी जीत और विपक्ष की सबसे कद्दावर नेता ममता बनर्जी और उनकी टीएमसी की करारी हार ने बीजेपी को वहां तक सोचने का मौका दे दिया है, जो कभी उसकी सोच से भी दूर रहा है। 2027 में बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में सरकार की वापसी की है लेकिन पार्टी के कई नेताओं ने बंगाल के नतीजों के बाद पंजाब फतह करने के भी सपने देखने शुरू कर दिए हैं।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा ने बुधवार को एक्स पर एक पोस्ट डाला है। इस पोस्ट में उन्होंने सिर्फ दो पोस्टर शेयर किए हैं। एक पोस्टर में उन्होंने जो तस्वीर लगाई है, उसपर लिखा है- '2026 झालमुड़ी ' और दूसरी तस्वीर में '2027 मक्के की रोटी सरसों का साग'। 
बंगाल की 'झालमुड़ी' ने विपक्ष को लगा दी मिर्ची
बंगाल चुनाव में प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारग्राम में एक साधारण सी दुकान पर जाकर झालमुड़ी खरीद कर खाई थी। यह बंगाल के आम लोगों का स्नैक्स आइटम है। पीएम मोदी का इस तरह से सड़क किनारे झालमुड़ी खाना, बंगाल चुनाव में बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। नतीजे भी ऐसे आए कि झालमुड़ी को बीजेपी ने राष्ट्रीय पहचान बना दिया। 
मक्के दी रोटी ,सरसों दा साग 
जिस तरह से बंगाल में झालमुड़ी आम लोगों से जुड़ी हुई है, उसी तरह से 'मक्के दी रोटी,सरसों दा साग'का नाम लेते ही दुनिया भर में कहीं भी हों पंजाब की मिट्टी की खुशबू फैलनी शुरू हो जाती है। 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव है और बग्गा ने उसी को देखते हुए अपनी ओर से अभी से एक चुनावी माहौल बनाने की कोशिश शुरू की है। 
बीजेपी ने पंजाब के लिए बांध ली बड़ी उम्मीद
हालांकि, तेजिंदर बग्गा अकेले नहीं हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने 4 मई को बंगाल में मतगणना वाले दिन ही अपने एक्स पोस्ट के जरिए पंजाब में माहौल बनाने की कोशिश शुरू कर दी थी। 
राघव चड्ढा और अन्य छह सांसदों ने बढ़ाया हौसला
पंजाब को लेकर बीजेपी के नेताओं में उम्मीदों भरे उत्साह के पीछे की सबसे बड़ी वजह आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा समेत बाकी सात सांसद हैं। इन सातों सांसदों में स्वाति मालीवाल को छोड़कर सभी पंजाब का ही प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 
विधानसभा चुनावों में लगातार मिल रही बीजेपी को जीत
बीजेपी ने आम आदमी पार्टी में पंजाब में जो सेंध लगाई है, उससे पूरे इंडी गठबंधन में खलबली मची हुई है।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पाई और जेडीयू-टीडीपी उसकी मजबूरी बनकर उभर आई।
लेकिन, उसके बाद जिस तरह से बीजेपी ने एक के बाद एक विधानसभा चुनावों में जिस तरह का अप्रत्याशित प्रदर्शन शुरू किया, इंडी गठबंधन को अपने सांसदों और विधायकों को अपने खेमे में बचाए रखना चुनौती बढ़ गई है।
विधानसभा चुनावों में लगातार जीत ने केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार को कहीं ज्यादा स्थिर बना दिया है।
कहां से मिल रही बीजेपी को इतनी टॉनिक
बिहार में नीतीश कुमार की जगह पर बीजेपी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने में सफलता पा चुकी है।
हकीकत ये है कि मोदी सरकार के खिलाफ ट्विटर पर रोजाना हमले करने वाले विपक्ष के नेताओं में हताशा भी बढ़ी हुई है और दरार भी चौड़ी हो रही है।
सबसे ताजा उदाहरण तमिलनाडु का है, जहां नतीजों के बाद कांग्रेस के रवैए ने डीएमके को भड़का दिया है।
लगता है कि विपक्ष की इस स्थिति और ममता बनर्जी को मिली अप्रत्याशित शिकस्त ने बीजेपी का हौसला इतना बढ़ा दिया है कि उसे अब पंजाब की राह भी आसान लगने लगी है।
एक बीजेपी पदाधिकारी से जब पंजाब में अकाली दल (SAD) के साथ आने की संभावनाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि 'राजनीति तो संभावनाओं का ही खेल' है। 
-Legend News

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