नई द‍िल्ली। नेपाल के सीमावर्ती जिलों में बन रही मस्जिदों और मदरसों में तुर्की मदद कर रहा है. इस काम में तुर्की का एक गैर-सरकारी संगठन फाउंडेशन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड फ्रीडम्स एंड ह्यूमैनिटेरियन रिलीफ (IHH) शामिल है. इस संगठन के चरमपंथी समूहों से संबंध होने की बात कही जाती है. इसे तुर्की सरकार और खुफिया एजेंसियों से समर्थन मिलने का आरोप है. आईएचएच जैसे संगठन नेपाल के स्थानीय इस्लामी समूहों जैसे इस्लामी संघ नेपाल (आईएसएन) के साथ मिलकर अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के लिए मस्जिदें, मदरसे, अनाथालय और इस्लामी केंद्र बना रहे हैं. जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए भी किया जा रहा है.

एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार तुर्की या तुर्किये अब नेपाल में पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के हितों के लिए एक जटिल चुनौती पेश कर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल के सीमावर्ती जिलों में तुर्की और पाकिस्तान समर्थित धार्मिक केंद्रों और नेटवर्कों का विकास भारत के लिए गंभीर और जटिल चुनौती है. विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और सीमा पार कट्टरपंथ की संभावना के संदर्भ में. बताया जा रहा है कि पिछले दो सालों में इन इलाकों में ₹500 करोड़ से ज्यादा की विदेशी फंडिंग हुई है.

भारत और नेपाल 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करते हैं. जो दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक है. इस खुली सीमा का फायदा उठाकर विभिन्न प्रकार की अवैध गतिविधियां भी होती रही हैं. अब इसमें बाहरी तत्वों द्वारा प्रभाव जमाने की कोशिशें भी शामिल हो गई हैं. तुर्की, पारंपरिक रूप से पश्चिमी और मध्य एशियाई मामलों में अधिक सक्रिय रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में उसने दक्षिण एशिया और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी पहुंच बनाने का प्रयास किया है.

क्या कहती है खुफिया रिपोर्ट
नेपाल में तुर्की की कार्रवाई हालांकि नई है, लेकिन महत्वपूर्ण है. तुर्की के गैर-सरकारी संगठन आईएचएच ने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं. उसने इस्लामी संघ नेपाल (आईएसएन) जैसे स्थानीय समूहों के साथ गठजोड़ किया है. आईएसएन पर भी चरमपंथी विचारधारा से संबंध रखने के आरोप हैं. आईएचएच ने अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के लिए मस्जिदों, मदरसों, अनाथालयों और इस्लामी केंद्रों के निर्माण को प्रायोजित किया है. आईएसएन से संबद्ध तुर्की अर्धसैनिक संगठन सादात की उपस्थिति इस क्षेत्र में मिलिशिया प्रशिक्षण और गुप्त अभियानों के बारे में संदेह पैदा करती है.  भारतीय खुफिया एजेंसियां इस क्षेत्र में तुर्की समर्थित तत्वों की गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरे के रूप में देखती हैं.

जटिल है तुर्की समर्थित तत्वों का पनपना
नेपाल सीमा पर तुर्की समर्थित तत्वों का पनपना भारत के लिए जटिल मामला है. पाकिस्तान के खुले तौर पर विरोधी रुख के विपरीत तुर्की का रुख ज्यादा सूक्ष्म है. क्योंकि वो इस्लामी नेटवर्कों के लिए मौन समर्थन के साथ-साथ सॉफ्ट पावर को भी जोड़ रहा है. भारत को चिंता है कि यह गतिविधियां धार्मिक कट्टरपंथ को बढ़ावा दे सकती हैं और सीमा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. साथ ही भारत-विरोधी प्रचार के नए रास्ते खुल सकते हैं. कई विश्लेषक इसे तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार करने के प्रयासों के रूप में देखते हैं, जो एक ‘खिलाफत’ की विचारधारा को बढ़ावा देने से जुड़ा है.

नेपाल सीमा पर पाकिस्तान का प्रभाव
पाकिस्तान ने भी अपनी जासूसी एजेंसी आईएसआई के माध्यम से भारत-नेपाल सीमा पर मस्जिदों और मदरसों के तेजी से प्रसार को फंंडिंग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह काम विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे प्रांतों में किया जा रहा है. खुफिया सूत्रों के अनुसार भारत की सीमा से सटे नेपाली प्रांतों में मस्जिदों की संख्या 2018 में 760 से बढ़कर 2021 में 1,000 हो गईं. इसी दौरान मदरसों की संख्या 508 से बढ़कर 645 हो गई. ये संस्थाएं न केवल धार्मिक प्रतिष्ठान हैं, बल्कि इन पर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अपराधियों और चरमपंथी गुर्गों को पनाह देने का भी आरोप है.
- Legend News

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