सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर हिंसा मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से तीन मुख्य बिंदुओं को लेकर जवाब मांगा। कोर्ट ने राज्य में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हो रही हिंसा को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने बेघर और हिंसा प्रभावित लोगों को दोबारा बसाने, सुरक्षाबलों की तैनाती और कानून व्यवस्था की जानकारी भी मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 10 जुलाई तय की है। 
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में केंद्र और मणिपुर सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जजों को बताया कि राज्य में स्थिति धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं। इस पर कोर्ट ने उनसे मणिपुर के हालात की ताजा दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘इसमें पुनर्वास शिविरों, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम और हथियारों की बरामदगी जैसे विवरण होने चाहिए।’’
मणिपुर के हालात पर क्या बोले सॉलिसिटर जनरल
कोर्ट में हुई संक्षिप्त सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने सुरक्षा बलों की तैनाती और कानून-व्यवस्था की हालिया स्थिति का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में कर्फ्यू की अवधि अब 24 घंटे से घटाकर पांच घंटे कर दी गई है। तुषार मेहता के मुताबिक राज्य में पुलिस, इंडियन रिजर्व बटालियन और सीएपीएफ की 114 कंपनियां भी तैनात हैं।
कुकी संगठन के वकील पर साधा निशाना
सुप्रीम कोर्ट में कुकी समुदाय की तरफ से पेश हुए वकील कॉलिन गोंजाल्वेज़ ने तर्क दिया कि उग्रवादी एक समाचार कार्यक्रम में आए और कहा कि वे कुकी समूहों का सफाया कर देंगे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुकी समूहों के खिलाफ हिंसा ‘‘राज्य द्वारा प्रायोजित’’ थी। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भड़कते हुए कहा कि कुकी समूहों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेज़ को चाहिए कि वह मामले को सांप्रदायिक रंग’ न दें।
कुकी समुदाय ने नेशनल हाईवे से हटाए अवरोध
गौरतलब है कि एक दिन पहले दो कुकी संस्थाओं ने मणिपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए अवरोध हटा लिए थे। दोनों ही पक्षों ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में शांति और सौहार्द लौटाने के लिए अपील की थी, जिसके बाद यह कदम उठाए गए।   
Compiled: Legend News

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