आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया है. शीर्ष कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है कि वे व्यक्तिगत तौर पर यह सुनिश्चित करें कि सड़कों-हाईवे पर आवार पशु और कुत्ते न रहें. इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है. अपने फैसले में जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि पीठ के आदेश तीन भागों में है. पहला अनुपालन पर आदेश है. एमिकस रिपोर्ट की विषय-वस्तु को हमारे आदेश के अभिन्न अंग के रूप में पढ़ा जाएगा. 
सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की एक बेंच ने अपने एक आदेश में सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वो आवारा कुत्तों और मवेशियों को हाईवे, सड़कों तथा एक्सप्रेस-वे से हटाएं. हालांकि कोर्ट का लिखित आदेश अभी जारी नहीं हुआ है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, इसका सख़्ती से पालन करना जरूरी है वरना वो अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर ज़िम्मेदार ठहराएगा. 
कोर्ट ने राज्यों के चीफ सेकेट्री को इन निर्देशों पर अमल करने को कहा है. राज्य 3 हफ्ते में इसको लेकर स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करेंगे.
कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि वे सरकारी और निजी संस्थानों जैसे अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, सार्वजनिक खेल परिसर, रेलवे स्टेशन आदि को इस तरह से घेर दें कि आवारा कुत्ते उनके अंदर प्रवेश ही न कर सकें. 
कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे परिसरों से मौजूदा आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी करानी होगी. इसके बाद उन्हें डॉग शेल्टर में भेजना होगा. 
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश अगली सुनवाई से पहले व्यापक हलफनामा दाखिल करेंगे, जिसमें रिपोर्ट में उजागर की गई खामियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख होगा. इसमें किसी भी तरह की ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा. 
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि दूसरा राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों से संबंधित है. निर्देशों की पुनः पुष्टि की जाती है कि सभी राज्यों के नोडल अधिकारी राष्ट्रीय राजमार्गों आदि से आवारा पशुओं को हटाना सुनिश्चित करेंगे. राजमार्गों या सड़कों या एक्सप्रेसवे पर पाए जाने वाले सभी जानवरों को तुरंत हटाने के लिए एक संयुक्त समन्वित अभियान चलाया जाएगा. मवेशियों और अन्य पशुओं को सभी आवश्यक देखभाल प्रदान की जाएगी. 
कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, रोड और ट्रांसपोर्ट ऑथोरिटी से कहा है कि वो सड़कों से आवारा जानवरों को हटाकर शेल्टर होम में शिफ्ट करें. साथ ही सभी नेशनल हाईवे पर हेल्पलाइन नंबर होगा जहां पर आवारा जानवरों को लेकर शिकायत की जा सके.
कुछ वकीलों ने आदेश पर चिंता जताई और कोर्ट से इसे संशोधित करने के लिए सुनवाई की मांग की. हालांकि बेंच से इसे ख़ारिज कर दिया. 
पहले दो जजों की बेंच ने दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम्स में बंद करने का आदेश दिया था.
जिसके बाद डॉग लवर्स की याचिका पर तीन जजों की बेंच ने निर्देश दिया कि जिन कुत्तों को पकड़ा गया है, उन्हें उसी इलाक़े में छोड़ा जाए. लेकिन
जिन कुत्तों को रेबीज है या रेबीज होने का संदेह है, उन्हें न छोड़ा जाए. इसी मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ता जुटे थे, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर खुशी जताई थी. 
-Legend News

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