सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घडि़याल अभयारण्य में अवैध बालू खनन की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया कि वे ऐसे कार्यों के लिए अक्सर उपयोग किए जाने वाले मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित करें।
इन राज्यों की 'पूर्ण विफलता' पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह 'मौन दर्शक' नहीं रह सकता। शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारी अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो उसे केंद्रीय बलों की तैनाती व बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसे निर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। 
अवैध खनन रोकने को SC ने दिए सख्त निर्देश
पीठ ने अगली सुनवाई 11 मई के लिए निर्धारित की है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार को कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि इन राज्यों को निवारक निरोध, संपत्ति और मशीनरी की जब्ती और अपराधियों को दंडित करने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए कठोर अभियोजन की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया। 
पीठ ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण केवल एक वैधानिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक आवश्यकता भी है। पीठ ने इन राज्यों को निर्देश दिया कि वे अवैध बालू खनन के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी मार्गों पर वाई-फाई सक्षम सीसीटीवी कैमरे स्थापित करें।
जीपीएस ट्रेकिंग उपकरण अनिवार्य
ऐसे कैमरों का लाइव फीड संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और वन विभाग के अधिकारी के सीधे नियंत्रण, पर्यवेक्षण और संचालन की देखरेख में रखा जाए।
जीपीएस ट्रेकिंग उपकरण अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं ताकि वास्तविक समय में निगरानी हो। इन राज्यों को निर्देश दिया कि वे अभयारण्य के अंतर्गत या उससे सटे जिले में पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों का संयुक्त गश्ती दल गठित करें। 
-Legend News

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