राज्यसभा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। इस विधेयक का मकसद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या को मौजूदा 34 से बढ़ाकर 38 करना है।
बहस के दौरान अपनी बात रखते हुए केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, 'न्यायपालिका पर बढ़ते काम के बोझ, न्यायिक मामलों की बदलती प्रकृति और उभरती संवैधानिक व कानूनी व्याख्याओं से जुड़े नए सवालों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाना समय की मांग थी और यह समय पर किया गया सुधार भी है।'
मई में जारी अध्यादेश की जगह लेगा कानून 
यह बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुका था और राज्यसभा में विचार-विमर्श के बाद इसे वापस उसी सदन में भेज दिया गया, जिससे संसदीय मंजूरी की प्रक्रिया पूरी हो गई। यह मई 2026 के उस अध्यादेश की जगह लेगा जिसमें कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई गई थी। 2019 के बाद सुप्रीम कुर्ती में जजों की यह पहली बढ़ोत्तरी है। 
राज्यसभा में अर्जुनराम मेघवाल ने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने 11 मई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में नए मामलों के दाखिले में भारी बढ़ोतरी और मामलों के निपटारे की दर बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जजों की जरूरत के बारे में बताया था। 
राज्यसभा में बोले अर्जुन राम मेघवाल
मेघवाल ने कहा, 'उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना केस फाइल होने की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने अनुमान लगाया कि एक साल में 10,000 केस का अंतर आ सकता है।' उन्होंने आगे कहा कि जजों की संख्या में कमी से आपराधिक अपीलों और अन्य मामलों में देरी होती है।
मंत्री ने जोर दिया कि लंबित मामलों की संख्या कम करना सरकार की प्राथमिकता है और जजों की संख्या बढ़ाना न्यायिक सुधारों का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, 'यह सुनिश्चित करने के लिए कि न्याय तक सबकी पहुंच हो और वह सबके लिए उपलब्ध हो, केंद्र सरकार लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करके उनकी संख्या कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाना न्यायिक कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में एक कदम है।'
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए 5 जज 
मेघवाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने 5 मई, 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसके बाद एक अध्यादेश जारी किया गया था।
1 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जज नियुक्त किए गए और सबसे पुराने लंबित दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए चार विशेष बेंच बनाई गई हैं। 
-Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).