बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले चुनावी अभियान चरम पर है। अगस्त 2024 में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देश में ये पहले चुनाव है। ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब देश में लगभग डेढ़ साल में कोई चुनावी हुई सरकार नहीं है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम शासन ने शेख हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाते हुए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। देश की सबसे बड़ी पार्टी की चुनाव में गैरमौजूदगी ने चुनावों की वैधानिकता को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनावी प्रक्रिया की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र का मजाक बताया है। 
चरमपंथियों को बढ़ा रही यूनुस सरकार
संडे गार्डियन को दिए एक इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि ये चुनाव लोकतांत्रिक या समावेशी नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इन चुनावों से देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी को किनारे कर दिया गया है। उन्होंने मोहम्मद यूनुस पर नागरिकों की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। पिछले कुछ सप्ताह में हिंदू अल्पसंख्यकों की हत्या का जिक्र करते हुए हसीना ने कहा कि यूनुस सरकार ने चरमपंथियों को ताकत दी है। दोषी आतंकवादियों को जेल से रिहा किया है और हिंसा करने वालों को पूरी छूट दी है। 
चुनावों को बताया लोकतंत्र का मजाक
हसीना ने कहा कि ये चुनाव लोकतंत्र का मजाक हैं। एक भी बांग्लादेशी के वोट के बगैर बनी (यूनुस) सरकार ने उस पार्टी (अवामी लीग) पर बैन लगा दिया है, जिसे लोगों ने 9 बार चुना है। उन्होंने यूनुस पर राजनीतिक विपक्ष को खत्म करने का आरोप लगाया औऱ कहा कि स्वतंत्र लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है। पुलिस उन सभी को गिरफ्तार कर रही है, जो नामांकन फॉर्म खरीदने की कोशिश करते हैं, जब तक वे BNP या जमात के लोग न हों। 
मोहम्मद यूनुस पर सीधा हमला बोलते हुए अवामी लीग नेता ने कहा कि 'यूनुस बैलेट बॉक्स में हमारा सामना करने के बजाय हमें प्रतिबंधित करना ज्यादा पसंद करेंगे क्योंकि उन्हें पता है कि जब बांग्लादेशियों को असली चॉइस दी जाती है, तो वे हमें वोट देंगे।' हसीना ने कहा कि इस चुनाव से जो सरकार बनेगी उसे अथॉरिटी के संकट का सामना करना पड़ेगा। वह लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं सकती। 
बांग्लादेश के अल्पसंख्यों में डर
हसीना ने बताया कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक डर में जी रहे हैं। उनके बिजनेस, घर और पूजा स्थलों को तबाह किया जा रहा है और वे बेबस देख रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस ने आतंकवादियों को रिहा कर दिया है और अपराधियों को पूरी छूट दे दी है। यूनुस सरकार ने हिंदुओं पर हो रहे हमलों को आपराधिक घटनाएं कहा है और धार्मिक एंगल से इनकार किया है। इस पर हसीना ने पलटवार किया कि दीपू चंद्र दास को उनके साथियों ने ईशनिंदा के आरोप में सबके सामने मार डाला। उनकी बॉडी को पेड़ से बांधकर चलाया और कट्टरपंथियों ने जश्न मनाया। इस घटिया काम को आपराधिक कहना पीड़ित का अपमान है और अपराधियों को इशारा है कि उन्हें कोई सजा नहीं मिलेगी। 
-Legend News

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