मथुरा। आज बुधवार को प्रातः 9 बजे मंगल वाद्य, मृदंग, मजीरे आदि की मंगल ध्वनि के मध्य  परम पूज्य श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य जी श्रीकृष्ण-जन्मभूमि से पीठ के लिए प्रस्थान किया।

 इस संबंध में जानकारी देते हुऐ श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा ने बताया कि आज प्रातः 9 बजे परम पूज्य शंकराचार्य जी ने श्रीकृष्ण-जन्मभूमि की दिव्य गौशाला एवं गौमाता के दर्शन कर वृहद मात्रा में जलेबी-प्रसाद खिलाया। तदोपरान्त मंगल ध्वनि एवं श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही वृहद पुष्पवर्षा के मध्य पूज्य शंकराचार्य जी महाराज भगवान श्रीकेशवदेवजी के दर्शन हेतु पधारे। ठाकुरजी श्रीकेशवदेवजी के दर्शन के उपरान्त मंदिर के प्रांगण में श्रीकृष्ण-जन्मभूमि की महिमा का वर्णन मंदिर में अंकित मंगल ‘ऊॅं’ चिन्ह के सानिध्य में किया।  

इसी पवित्र स्थान पर दिव्य प्रवचन आज से लगभग 40 वर्ष पूर्व श्रृंगेरी पीठ के तत्कालीन परम पूज्य शंकराचार्य अभिनव विद्यातीर्थ महास्वामीगल जी महाराज एवं उनके उत्तराधिकारी एवं वर्तमान पूज्य शंकराचार्य जी श्री भारततीर्थ जी महास्वामीगल ने जन्मस्थान पर पूर्व प्रवास में किया था। आज से 40 वर्ष पूर्व अपने परम गुरू एवं वर्तमान गुरू का उसी स्थान पर प्रवचन के दिव्य फोटो को देखकर परम पूज्य उत्तराधिकारी शंकराचार्य जी अत्यन्त भाव-विभोर हो उठे। पूज्य शंकराचार्य जी के भाव को संकेत समझते हुऐ उसी स्थान पर पर उत्तराधिकारी पूज्य शंकराचार्य जी का प्रवचन आयोजित किया,  जिसका लाभ दर्शनार्थ पधारने वाले स्थानीय श्रद्धालुओं ने तो लिया ही बल्कि बाहर से दर्शनार्थ पधारे हजारों श्रद्धालुओं ने भी पूज्य शंकराचार्य जी के आशीर्वचनों का आनन्द ले रहे थे।

श्री शर्मा ने आगे बताया कि आदि शंकराचार्य जी परंपरा के तीन पूज्य शंकराचार्य श्रृंगेरी मठ से ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर दर्शन हेतु पधारे हैं, साथ ही भगवान श्रीकेशवदेवजी के सानिध्य में परंपरा के तीन पूज्य शंकराचार्य जी द्वारा प्रवचन, आशीर्वचन प्रदान करना भी एक विलक्षण आध्यात्मिक घटना है। 

वृहद पुष्पवर्षा एवं मंगल ध्वनि के मध्य पूज्य शंकराचार्य जी के संस्थान के सचिव श्री कपिल शर्मा, अन्य अधिकारी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के द्वारा भावपूर्ण विदाई दी गयी।
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