अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के प्रेशर को धता बताते हुए भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने की तैयारी चल रही है। दोनों देश इस तरह से अपनी रणनीतिक साझेदारी को डिजाइन कर रहे हैं जिसमें ग्लोबल पॉलिटिक्स में तेजी से बदलते जियोपॉलिटिकल हालात, आर्थिक और रणनीतिक बदलावों और अनिश्चितताओं का सामना कर सकें।
यह साझेदारी इसलिए और भी अहम हो जाती है क्योंकि यूरेशियाई इलाका इंटरनेशनल सिस्टम में बड़े बदलावों का केंद्र बन रहा है। इससे सेंट्रल एशिया और उसके बाहरी इलाकों जिसमें साउथ एशिया भी शामिल है उनमें पावर का संतुलन बदल रहा है और इसके दूरगामी असर होने की संभावना हैं। 
'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी और उनके बीच आठ दशकों के डिप्लोमैटिक संबंध, ग्लोबल शांति और सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर और समय की कसौटी पर खरे उतरे स्तंभ रहे हैं।
भारत और रूस नये सिरे से गढ़ रहे रिश्ते
रिपोर्ट में कहा गया है कि 'रणनीतिक और खास पार्टनर के तौर पर भारत और रूस ने आपसी सहयोग और अलग-अलग इंटरनेशनल मंचों पर साथ मिलकर काम करने के अपने संकल्प को फिर से दोहराया है। भारत की 'पंचशील' यानि पांच सिद्धांत वाली विदेश नीति की भावना के मुताबिक जो 1950 के दशक से ही इसकी पहचान रही है, यह आपसी रिश्ता एक ऐसी स्थिर और अनुमान लगाने योग्य मल्टी-पोलर और न्यायपूर्ण वर्ल्ड ऑर्डर बनाने की दिशा में काम कर रहा है जो सभी देशों की संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और उनके आंतरिक मामलों में दखल न देने पर आधारित हो और जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो। 
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सालाना शिखर सम्मेलन-स्तर की बैठक भारत और रूस के बीच 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप डायलॉग' के तहत स्थापित सबसे बड़ा संस्थागत बातचीत का जरिया थी। इसमें बताया गया कि 2025 के सालाना शिखर सम्मेलन में कई क्षेत्रों में अरबों डॉलर के बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन क्षेत्रों में रक्षा, जलवायु परिवर्तन, ध्रुवीय अनुसंधान, कानूनी मध्यस्थता, निवेश को बढ़ावा देना, ऊर्जा, व्यापार और नवाचार, कृषि, अंतरिक्ष और स्मार्ट सिटी शामिल हैं।
भारत और रूस के बीच नये स्तर का डिफेंस एग्रीमेंट
रिपोर्ट में कहा गया है 'महत्वपूर्ण समझौतों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के कई पहलू शामिल थे जिनमें पांच S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, चार एडमिरल ग्रिगोरोविच-क्लास (प्रोजेक्ट 11356) गाइडेड मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट के लिए अंतर-सरकारी समझौते (IGA) और भारत में 200 'कामोव'-226 हेलीकॉप्टर बनाने के लिए एक संयुक्त उद्यम (JV) के लिए शेयरधारकों का समझौता। दोनों पक्षों ने रूस से भारत तक गैस पाइपलाइन के संयुक्त अध्ययन के लिए भी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए।' 
भारत और रूस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर जोर देते हुए रिपोर्ट में सहयोग के प्रमुख उदाहरणों के तौर पर ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संयुक्त डिजाइन और विकास और भारत में SU-30 विमान और T-90 टैंक के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन का जिक्र किया गया। गोवा के तट पर भारतीय नौसेना में रूस में बने विमान वाहक पोत INS विक्रमादित्य को शामिल करना एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि थी जो दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग को दर्शाता है। 
-Legend News

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