बंगाल चुनाव 2026 में हार के बाद ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने पर वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने ममता को सीएम ऑफिस में ‘घुसपैठिया’ बताते हुए कहा है कि राज्यपाल को उनको बर्खास्त कर देना चाहिए. 
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत हुई है. इसके बावजूद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. इस पर देश के सबसे बड़े वकीलों में शुमार महेश जेठमलानी ने अपने गुस्से का इजहार किया है. उन्होंने ममता बनर्जी के इस कदम को भारतीय लोकतंत्र और संविधान के लिए ‘खतरनाक स्टंट’ करार दिया है.
चुनाव हारने के बाद पद पर रहना ‘अवैध कब्जा’: जेठमलानी
महेश जेठमलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक बार जनादेश हारने के बाद मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना पद पर ‘अवैध कब्जा’ है. अगर वे स्वेच्छा से नहीं हटती हैं, तो राज्यपाल को उन्हें अपमानजनक तरीके से बर्खास्त कर देना चाहिए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि 7 मई के बाद उन्हें दफ्तर में एक घुसपैठिये (Trespasser) की तरह माना जाना चाहिए.
नैतिकता नहीं, यह अराजकता है: महेश जेठमलानी
महेश जेठमलानी ने ममता बनर्जी के ‘मोरल विक्ट्री’ और ‘साजिश’ वाले दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा- ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना संवैधानिक मानदंडों की धज्जियां उड़ाना है. जनादेश खोने के बाद वे अब मुख्यमंत्री नहीं हैं. अगर वे कुर्सी नहीं छोड़ती हैं, तो उन्हें धक्के मारकर बाहर निकाला जाना चाहिए. 
7 मई की डेडलाइन और विपक्षी साजिश का हिस्सा
उन्होंने चेतावनी दी कि निवर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है. इसके बाद उनकी हर गतिविधि ‘अवैध’ होगी और उनके खिलाफ ‘ट्रेसपासिंग’ (अनाधिकृत प्रवेश) का मामला बन सकता है. देश के सीनियर एडवोकेट ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी का यह कदम राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं के साथ मिलकर बनाया गया एक ‘सुनियोजित प्लान’ है, ताकि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बदनाम किया जा सके. 
राज्यपाल के पास केवल एक ही विकल्प: डिस्मिसल इन डिस्ग्रेस
जेठमलानी के अनुसार, संविधान के तहत राज्यपाल की शक्तियां अब निर्णायक हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री केवल राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (Pleasure of Governor) पद पर बने रहते हैं. जब जनता ने बहुमत नहीं दिया, तो राज्यपाल को उनकी बर्खास्तगी का आदेश तुरंत जारी करना चाहिए.
संवैधानिक मर्यादा और सिस्टम का मजाक
जेठमलानी ने कहा कि लोकतंत्र में हार को स्वीकार करना पड़ता है. हार के बाद ‘मैं इस्तीफा नहीं दूंगी’ कहना एक संवैधानिक पदाधिकारी के लिए शर्मनाक है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर हर हारा हुआ मुख्यमंत्री यही कहने लगे कि चुनाव में साजिश हुई है और वह पद नहीं छोड़ेगा, तो देश में अराजकता फैल जायेगी. 
राजनीतिक हलकों में हड़कंप
महेश जेठमलानी के इस कड़े बयान के बाद टीएमसी और भाजपा के बीच ‘वाकयुद्ध’ तेज हो गया है. भाजपा नेता अब ममता बनर्जी को ‘बर्खास्त’ करने की मांग करने लगे हैं, तो टीएमसी इसे ‘बदले की राजनीति’ बता रही है. जानकारों का मानना है कि जेठमलानी का यह बयान राज्यपाल के संभावित एक्शन के लिए एक बड़ा कानूनी आधार तैयार कर सकता है. अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी की ‘सम्मानजनक’ विदाई होगी या उन्हें बर्खास्त किया जायेगा. 
-Legend News

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