सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि कोर्ट का काम किसी मुख्यमंत्री के दौरे को नियंत्रित करना नहीं है। जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि क्या आप लोग चाहते हैं कि कोर्ट इस बात का फैसला करे कि मुख्यमंत्री को क्या करना है और क्या नहीं? डीएमके ने अपनी याचिका में कहा था कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय करूर का दौरा करके भगदड़ के पीड़ितों से मिलकर गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उनके भाषणों और दोरे को रोक दिया जाए। 
मुख्यमंत्री को क्यों नियंत्रित करे सुप्रीम कोर्ट?
इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालत मुख्यमंत्री के दौरे को कैसे नियंत्रित कर सकती है, भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों से मुलाकात को गवाहों को प्रभावित करना कैसे माना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने डीएमके से करूर भगदड़ मामले के गवाहों को तमिलनाडु के मंत्रियों द्वारा प्रभावित करने के आरोप वाली याचिका वापस लेने को कहा और ऐसा नहीं करने पर याचिका खारिज करने की चेतावनी दी। इसके बाद डीएमके ने याचिका वापस लेने पर सहमति जताई।
अर्जेंट सुनवाई को तैयार हो गया था कोर्ट, अब वापस लेनी पड़ी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, क्या आप लोग अभिव्यक्ति की आजादी में भी रुकावट पैदा करना चाहते हैं। अगर आप लोग अपनी बात रख सकते हैं तो दूसरा कोई क्यों नहीं रख सकता। इससे पहले डीएमके के वकील ने कहा था कि उन्हें आरोपी बनाने का एक नैरेटिव गढ़ा जा रहा है। इससे पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट डीएमके की याचिका पर अर्जेंट सुनवाई के लिए तैयार हो गया था। इस याचिका में कहा गया था कि टीवीके चीफ विजय और उनके साथी गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सीएमम विजय 10 जुलाई को करूर का दौरा करने वाले हैं। यहां हुई भगदड़ में कम से कम 41 लोगों की मौत हुई थी। याचिका में यह भी मांग की गई है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, राज्य के मंत्री आधव अर्जुन और मामले में आरोपी अन्य लोगों को इस मामले पर सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए तथा सीबीआी द्वारा की जा रही जांच के लंबित रहने के दौरान पीड़ितों के परिवारों के साथ उनकी बातचीत को नियंत्रित किया जाए।
याचिका में 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) विधायक आधव अर्जुन के पिछले हफ्ते दिए गए कथित सार्वजनिक बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि करूर की घटना का ''हिसाब चुकता करना'' बाकी है और पिछली द्रमुक सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने पुलिस के माध्यम से करूर के लोगों की ''हत्या'' करवाई। 
-Legend News

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