रिपोर्ट : LegendNews
सोनभद्र: रेणुका नदी में बालू खनन घोटाला, ओमैक्स मिनरल्स के खिलाफ जांच शुरू
सोनभद्र। पहले से ही अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही रेणुका नदी अब एक और बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। नदी में संचालित दो बालू खनन पट्टों को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर खनन जगत तक हलचल मचा दी है। आरोप हैं कि खनन नियमों की खुलेआम अनदेखी कर न केवल नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि पट्टा आवंटन और संचालन की पूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं।
मामले में सबसे बड़ा आरोप मेसर्स ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके पूर्व निदेशक बताए जा रहे सचिन अग्रवाल से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि निदेशक पद से इस्तीफा देने के बावजूद सचिन अग्रवाल ने खुद को कंपनी का निदेशक बताकर खनन पट्टे की रजिस्ट्री सहित कई सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो मामला केवल खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े के गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
नदी के अस्तित्व पर मंडराया खतरा रेणुका नदी में छत्तीसगढ़ की ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और आरके ट्रांसपोर्ट एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को बालू खनन का पट्टा आवंटित है। आरोप है कि दोनों पट्टाधारकों ने आपसी समन्वय से ऐसा तंत्र विकसित कर लिया है जिससे नदी के दोनों किनारोंऔर विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रतिवर्ष मानसून के दौरान तीन माह के लिए खनन बंद होने से पहले किए जाने वाले प्राथमिक परीक्षण मेंजितनी बालू उपलब्ध दिखाई जाती है, उससे कहीं अधिक मात्रा में परिवहन परमिट जारी कर बालू निकासी की जाती है। आरोप यह भी है कि उपलब्ध भंडार से अधिक खनन और परिवहन का खेल वर्षों से चलता आ रहा है।
पोकलेन और पंप से खनन के आरोप शिकायतों में दावा किया गया है कि रेणुका नदी की प्राकृतिक धारा को कई स्थानों पर कृत्रिम रूप से मोड़ दिया गया है। नदी तल में पोकलेन मशीनें उतारकर खनन किया जा रहा है तथा कुछ स्थानों पर पानी के भीतर से पंप के जरिए बालू निकाली जा रही है।
पर्यावरणीय मानकों के अनुसार नदी तल में सीमित गहराई तक ही खनन की अनुमति होती है और जलधारा को प्रभावित नहीं किया जा सकता, लेकिन आरोप है कि यहां नियमों की अनदेखी कर नदी के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया गया है। इतना ही नहीं,, पट्टा क्षेत्र से बाहर तथा वन विभाग की भूमि में भी खनन किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
ओमैक्स मिनरल्स के पट्टे की वैधता पर सबसे बड़ा सवाल विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के खनन पट्टे की वैधता से जुड़ा है।
शिकायत के अनुसार ग्राम खेवंधा, थाना जुगैल, तहसील ओबरा स्थित आराजी संख्या 246 (खंड-स), रकबा 7.00 हेक्टेयर क्षेत्र में बालू/मोरम खनन कापांच वर्षीय पट्टा 9 जनवरी 2023 से 8 जनवरी 2028 तक के लिए स्वीकृत किया गया था। इस पट्टे की रजिस्ट्री 23 जनवरी 2023 को हुई।
आरोप है कि रजिस्ट्री के दौरान कंपनी की ओर से सचिन अग्रवाल ने स्वयं को निदेशक बताते हुए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, निदेशक की मोहर का उपयोग किया और रजिस्ट्री कार्यालय में उपस्थित होकर फोटो भी खिंचवाई। जबकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि
सचिन अग्रवाल 14 नवंबर 2022 को ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे चुके थे।
- Legend News

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