मुंबई में जन्मे ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी को आजकल भारत की बहुत ज्यादा चिंता सता रही है। वह भारत में मोदी सरकार के कार्यकाल में फ्री स्पीच और प्रेस फ्रीडम को लेकर चिंतित हैं। सलमान रुश्दी वही ब्रिटिश उपन्यासकार हैं, जिनकी किताब द सैटेनिक वर्सेज को भारत में बैन कर दिया गया था। दो साल पहले भारत में द सैटेनिक वर्सेज पर लगे कथित प्रतिबंध का रास्ता साफ किया गया है। एक इंटरव्यू में रुश्दी ने भारत को लेकर कई सारी बातें की हैं और दावा किया है कि भारत के कथित मौजदूा हालातों को लेकर वह परेशान हैं। 
बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद से चिंतित रुश्दी 
ब्लूमबर्ग ने एक्स पर सलमान रुश्दी के इंटरव्यू को प्रमोट करने के लिए एक पोस्ट लिखा है। इसके अनुसार, 'उपन्यासकार सलमान रुश्दी मोदी के भारत में बढ़ते हिंदू राष्ट्रवाद और अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंधों को लेकर बहुत चिंतित हैं। मिशाल हुसैन से बात करत हुए वे कहते हैं, उन्होंने एक दशक पहले ही चेतावनी का पहल संकेत देखा था।' 
इतिहास फिर से लिखने की इच्छा 
रुश्दी ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में बताया है, 'भारत में मेरे कई दोस्त हैं। पत्रकारों, लेखकों, बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों आदि पर हमले को लेकर सभी लोग बहुत ज्यादा परेशान हैं।' उन्होंने कहा, 'लगता ऐसा है कि देश का इतिहास फिर से लिखने की इच्छा है, निश्चित रूप से हिंदुओं को अच्छा और मुसलमानों को खराब कहने के लिए, इस चीज को वीएस नायपॉल ने एक बार 'घायल सभ्यता' कहा था,यह विचार कि भारत एक हिंदू सभ्यता है, जो मुसलमानों के आने से घायल हुआ है। इस प्रोजेक्ट के पीछे बहुत बड़ी शक्ति है।' 
फतवे के चलते हमला झेल चुके हैं रुश्दी
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2025 में भारत को 151वां स्थान दिया गया है, जो कि पिछले साल की 159वें स्थान के मुकाबले थोड़ा बेहतर है। वैसे भारत के नेताओं ने इस तरह की रैंकिंग को लेकर ही पश्चिम पर पक्षपात का आरोप लगाया है। ब्रिटिश नागरिक सलमान रुश्दी अमेरिका में फ्रीडम ऑफ स्पीच को लेकर जानलेवा हमला भी झेल चुके हैं। उनपर 2022 में हादी मातर नाम के शख्स ने 17 बार धारदार हथियार से हमला बोला था, जिसमें उनकी एक आंख भी चली गई। वैसे वे 1989 से ही द सैटेनिक वर्सेज के लिए ईरान के कट्टरपंथी धार्मिक नेता अयातुल्ला खमैनी के फतवे का सामना कर रहे हैं। 
रुश्दी के दावे पर भड़के आलोचक
सलमान रुश्दी के ताजा इंटरव्यू में भारत को लेकर उनके आरोपों पर आलोचकों ने उनपर दो तरफ से हमला बोला है। एक तो उनकी किताब द सैटेनिक वर्सेज के छपते ही 1988 में कांग्रेस की तत्कालीन सरकार ने उसे बैन कर दिया था। आलोचकों की शिकायत है कि राजीव गांधी सरकार मुस्लिम ताकतों के दबाव में थी। वहीं, भारत में उनकी किताब पर 2024 में मोदी सरकार के कार्यकाल में पाबंदी हटाने की बात सामने आ रही है। कमेंटेटर मोनिका वर्मा ने एक्स पर लिखा है, 'मुस्लिम कट्टरपंथियों के चलते एक आंख गंवा चुके सलमान रुश्दी को हिंदू राष्ट्रवाद की चिंता है। वे जानते हैं कि दूसरी आंख को सुरक्षित रखने के लिए किसे टारगेट करना है।' 
-Legend News

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