रूसी कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट (ROE) ने भारत को सबसे नए T-90MS टैंक के जॉइंट प्रोडक्शन का प्रस्ताव दिया है। रूसी न्यूज़ एजेंसी आरटी की रिपोर्ट के मुताबिक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट, जो रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी है उसने कहा है कि T-90MS का संयुक्त उत्पादन टैंक सेक्टर में रूस-भारत सहयोग का अगला चरण हो सकता है। T-90MS रूस की सबसे नई T-90M टैंक सीरीज का एक्सपोर्ट वर्शन है जिसे रोस्टेक का ही हिस्सा यूरालवगोनज़ावॉड ने डिजाइन और मैन्युफैक्चर किया है।
भारत के पास पहले से ही T-72 और T-90S टैंकों का एक बड़ा बेड़ा मौजूद है जिन्हें देश की अपनी डिफेंस इंडस्ट्री सफलतापूर्वक अपग्रेड कर रही है। ROE के मुताबिक T-90MS के स्थानीय स्तर पर निर्माण का संभावित प्रोजेक्ट कई चरणों में लागू किया जा सकता है। पहला भारतीय सुविधाओं में असेंबली के लिए टेक्नोलॉजी किट की सप्लाई और दूसरा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का स्थानीयकरण। 
रूस ने भारत को T-90MS टैंक साथ बनाने का दिया प्रस्ताव
कंपनी के प्रतिनिधि ने कहा 'पहले से ट्रांसफर की गई टेक्नोलॉजी से जो तकनीकी आधार तैयार हुआ है उससे भारतीय उद्यमों में T-90MS और उस पर आधारित कॉम्बैट वाहनों के प्रोडक्शन को शुरू करने में लगने वाली लागत और समय दोनों में काफी कमी आती है।' आरटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल की शुरुआत में रोस्टेक के CEO सर्गेई चेमेज़ोव ने भी T-90MS के कॉम्बैट क्षमता की तारीफ करते हुए कहा था कि यह NATO के अपने समकक्षों से कहीं बेहतर है।
उन्होंने कहा T-90MS में कुछ सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और नए टेक्निकल सॉल्यूशन शामिल हैं जिनमें से कई का अभी युद्ध के मैदान में टेस्ट किया जा रहा है। ROE के प्रतिनिधि ने आगे कहा 'इसके प्रोटेक्शन सूट जिसमें एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर, स्लैट स्क्रीन, UAV के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और एक्टिव प्रोटेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा यह टैंक अलग-अलग तरह के आर्मर प्रोटेक्शन के सिद्धांत का भी इस्तेमाल करता है।' 
T-90MS में लगा है नया फायर कंट्रोल सिस्टम
T-90MS टैंक में 'डिजिटल ऑनबोर्ड' आर्किटेक्चर पर आधारित एक नया फायर-कंट्रोल सिस्टम भी लगा है। इसके डिजाइन में इंटीग्रेटेड इन्फॉर्मेशन-कमांड सिस्टम और दूसरे नए समाधान शामिल हैं। आर्टिलरी राउंड और गाइडेड मिसाइलों की नई रेंज की वजह से इस टैंक की फायरपावर बेहतर हुई है।
T-90MS की तुलना विदेशी टैंक मॉडलों से करते हुए उरालवागोनज़ावॉड के एक प्रतिनिधि ने मई में TASS को बताया कि युद्ध के मैदान में T-90M का इस्तेमाल करने वाले रूसी सैनिकों के मुताबिक इस टैंक ने यूक्रेन संघर्ष में कॉम्बैट मिशन के दौरान बहुत ज्यादा असरदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने आगे कहा कि यह टैंक पश्चिमी देशों के मुख्य बैटल टैंकों जैसे कि अमेरिकी M1 अब्राम्स और जर्मन लेपर्ड 2 के मुकाबले काफी अच्छा है। 
-Legend News

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