16 जनवरी शुक्रवार... आज का दिन बिहार की सियासत के लिए काफी अहम रहा। एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्रा' पर निकल पड़े, तो दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपने सरकारी आवास पर राजद की कोर कमेटी की मीटिंग बुलाई।
उनकी मीटिंग के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि, इस बीच राजद और लालू परिवार से अलग हो चुकीं रोहिणी ने भी बिना नाम लिए भाई पर निशाना साध दिया। रोहिणी आचार्य ने स्पष्ट रूप से तेजस्वी की मीटिंग को 'दिखावा' करार दिया। 
रोहिणी ने एक्स पर लिखा- "समीक्षा का दिखावा करने से ज्यादा जरूरी 'खुद' आत्म-मंथन ' करने और जिम्मेदारी लेने की है, 'अपने' इर्द-गिर्द कब्जा जमाए बैठे चिह्नित 'गिद्धों' को ठिकाने लगाने का साहस दिखाने के बाद ही किसी भी प्रकार की समीक्षा की सार्थकता साबित होगी। ये जो पब्लिक है न, वो सब जानती-समझती ही है। 
...तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती 
इससे पहले, 10 जनवरी को भी रोहिणी आचार्य ने एक पोस्ट कर सियासी पारा हाई कर दिया था। रोहिणी ने तब लिखा था- बड़ी शिद्दत से बनाई और खड़ी की गई "बड़ी विरासत" को तहस-नहस करने के लिए परायों की जरूरत नहीं होती, "अपने" और अपनों के चंद षड्यंत्रकारी "नए बने अपने" ही काफी होते हैं। 
उन्होंने आगे लिखा- हैरानी तो तब होती है , जब "जिसकी" वजह से पहचान होती है, जिसकी वजह से वजूद होता है, उस पहचान, उस वजूद के निशान को बहकावे में आ कर मिटाने और हटाने पर "अपने" ही आमादा हो जाते हैं... जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है, अहंकार सिर पर चढ़ जाता है.. तब "विनाशक" ही आंख-नाक और कान बन बुद्धि-विवेक हर लेता है। 
-Legend News 

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