पाकिस्तान की सुरक्षा चीन और तुर्की के रहमोकरम पर टिकी हुई है। जब पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी नई एयर डिफेंस क्षमताओं का प्रदर्शन किया तो इसका खुलासा हो गया। भारत का पड़ोसी सैन्य मामलों में अपने आयरन ब्रदर चीन और डिफेंस पार्टनर तुर्की पर हद से ज्यादा निर्भर है। 
पाकिस्तान ने इस दौरान रूस की नकल कर और चीन द्वारा रिवर्स इंजीनियरिंग से बनाए गए कम दूरी वाले धरती से हवा में मार करने वाली HQ-17 AE मिसाइल का प्रदर्शन किया। साथ ही तुर्की के काउंटर-UAV सिस्टम और सेल्फ-प्रोपेल्ड एंटी-एयरक्राफ्ट गन भी इसमें शामिल थे। चीनी J-10 और JF-17 फाइटर जेट्स के अलावा, PAF ने तुर्की और चीन के आर्म्ड ड्रोन अकिंसी और विंग लोंग II का भी प्रदर्शन किया। 
आपको बता दें कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों को निशाना बनाने के लिए विंग लोंग II ड्रोन का ही इस्तेमाल किया था।
भारत को इस बात की हैरानी हो रही है कि पाकिस्तान के पास तुर्की और चीन से ये हथियार खरीदने के लिए पैसे कहां से आते हैं। क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत ही खराब हालत से गुजर रही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि हथियारों की इस भारी खरीद के लिए पैसा कौन दे रहा है। इसका जवाब शायद सऊदी अरब, नया दोस्त बना अमेरिका या फिर पाकिस्तान में किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बदले चीन के साथ इक्विटी स्वैप हो सकता है।
बता दें कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से मिली शर्मनाक हार के बाद से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार से अरबों डॉलर के हथियार, अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल, मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है। अरब सागर में भारतीय नौसेना का मुकाबला करने के लिए वह अपनी नौसेना को भी मजबूत कर रहा है। इसमें चीन की 8 युआन-क्लास डीजल अटैक सबमरीन और चीनी गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट शामिल हैं। मक्का अलायंस का हिस्सा होने के कारण पाकिस्तान को सऊदी अरब और तुर्की के जरिए अमेरिकी डिफेंस टेक्नोलॉजी का भी लाभ मिलेगा। 
भारत का फोकस स्वदेशी पर
पाकिस्तान भले ही चीन, तुर्की और अमेरिका जैस देशों की भीख पर अपना डिफेंस सिस्टम मजबूत करने में लगा हुआ है, लेकिन भारत लंबी दूरी के लोइटरिंग एम्युनिशन के मामले में अपनी कमी को तेजी से पूरा कर रहा है। मोदी सरकार इसके लिए स्वदेशी पर ध्यान दे रही है। देश के प्राइवेट सेक्टर को निवेश के लिए बुलाया जा रहा है। भारत ऐसा इसलिए कर रहा है क्योंकि अमेरिका से 31 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदने में समय लगेगा और UCAV की डिलीवरी 2028 से ही शुरू होगी।
इसके अलवा भारत रूस की RVV-BD मिसाइल जैसी 250 किमी से ज्यादा रेंज वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल विकसित करने पर विचार कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने Su-30 MKII फाइटर जेट में दो रूसी RVV-BD मिसाइलों को लगाने की मंजूरी दे दी है। अगर यह सफल रहता है तो भारत सीमित संख्या में रूसी मिसाइलें खरीद सकता है और साथ ही इसी रेंज की अस्त्र मार्क III मिसाइल बनाने पर भी ध्यान दे सकता है। भारत जल्द ही एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर के लॉन्ग-रेंज का परीक्षण करेगा। इससे सबसे खराब हालात में भी पाकिस्तान की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया जा सके। 
-Legend News

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