अभी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एलान किया था कि भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू होगा। लेकिन यूसीसी को लेकर बिहार में अब पेंच फंसता नजर आ रहा है। दरअसल, बिहार में सरकार में सहयोगी जदयू की तरफ से कहा गया है कि बिहार में यूसीसी लागू करने का सवाल ही खड़ा नहीं होता है। जदयू के दिग्गज विधायक श्याम रजक ने कहा कि संसद में उनकी पार्टी यूसीसी का समर्थन किया था लेकिन यह भी कहा था कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। 
श्याम रजक ने कहा, ‘जब संसद में यह पास हो रहा था तब हमने उसी समय कहा था और हमारे नेता ने कहा था कि इसको हम अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। हमने उस बिल का समर्थ किया था। लेकिन समर्थन के साथ-साथ हमने कहा था कि बिहार में लागू नहीं होगा और आज तक हम उसी पर कायम हैं।’ श्याम रजक ने आगे कहा कि बिहार में बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन एनडीए का जो गठबंधन है उसमें जनता दल (यू), लोजपा (आर) और रालोमो सभी लोग मिलजुले हुए हैं। यहां स्वतंत्र सरकार नहीं है। श्याम रजक ने कहा कि किसी भी सूरत में इसके लागू होने का सवाल ही नहीं उठता है। 
आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में ऐलान किया था कि देश के 21 राज्यों में भाजपा और भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करेंगी। गृहमंत्री शाह ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पिछले 12 वर्षों के दौरान केंद्र की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की 25 साल की यात्रा का जिक्र किया। इस दौरान शाह ने तीन तलाक, भारतीय न्याय संहिता समेत मोदी सरकार द्वारा लिए गए कई बड़े फैसलों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के जरिए देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में एक ही वर्ष में सजा दिलाने की दर में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे यह तय हो सके कि पीड़ित को तीन साल के भीतर न्याय मिल सके। 
17 से सेवा संकल्प अभियान
अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और गुजरात तथा केंद्र में मोदी शासन के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक देशभर में सेवा संकल्प अभियान की घोषणा की थी।
समान नागरिक संहिता
समान नागरिक संहिता का अर्थ है एक देश, एक कानून। इसमें विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारा, गोद लेना, भरण-पोषण, वसीयत, पारिवारिक अधिकार से जुड़े विषयों पर सभी के लिए एक जैसा कानून होता है। अभी भारत में आपराधिक मामलों के लिए तो एक ही कानून है, लेकिन सिविल मामलों में धर्मों के अपने पर्सनल लॉ लागू होते हैं। 
-Legend News

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