नई द‍िल्ली।  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक नया और सख्त नियम जारी किया है, जिसके तहत बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और एनबीएफसी (NBFCs) कर्ज न चुकाने वाले डिफॉल्टर्स (डिफॉल्टर्स) या उनसे जुड़ी कंपनियों को उनकी जब्त की गई संपत्ति वापस नहीं बेच सकेंगे। यह नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा।आरबीआई के इस फैसले से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:सस्ते में संपत्ति खरीदने पर रोक: अक्सर डिफॉल्टर्स अपनी जानबूझकर छोड़ी गई या जब्त की गई संपत्ति (जैसे जमीन, मकान या फैक्ट्रियां) को फर्जी कंपनियों या रिश्तेदारों के जरिए बहुत कम कीमत पर वापस खरीद लेते थे, जिस पर अब पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।सार्वजनिक नीलामी (Public Auction): बैंकों को जब्त की गई अचल संपत्ति को मुख्य रूप से 'सरफेसी एक्ट, 2002' के तहत सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से पारदर्शी तरीके से बेचना होगा।7 साल की समयसीमा: बैंक किसी भी जब्त संपत्ति को अनिश्चितकाल के लिए अपने पास नहीं रख सकते हैं। बैंकों को इसे अधिकतम 7 साल के भीतर बेचना अनिवार्य होगा।बैलेंस शीट के नए नियम: जब्त की गई संपत्तियों को अब 'सकल एनपीए' (Gross NPA) या 'शुद्ध एनपीए' (Net NPA) के रूप में नहीं गिना जाएगा, बल्कि इन्हें बैलेंस शीट में अलग से दर्ज किया जाएगा।

- Legend News

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