भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मानसून कमजोर रहा या वैश्विक हालात और बिगड़े, तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
दूरदर्शन को दिए एक इंटरव्यू में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और कई देशों की मुद्राएं कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहा है और इसकी स्थिति सामान्य मानी जा सकती है। 
यहां से मिल रही अर्थव्यवस्था को मजबूती
आरबीआई गवर्नर ने बताया कि भारत का सेवा निर्यात, विदेशों में रहने वाले भारतीयों से आने वाला पैसा (रेमिटेंस), रिकॉर्ड विदेशी निवेश (FDI) और नए व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। इससे भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत रहेगा और निर्यात को भी फायदा मिलेगा।चुनौतियों का किया जिक्र
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड में निवेश आसान बनाया है। इसके अलावा ब्रिटेन के साथ हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और यूरोपीय संघ तथा अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताएं भी भारत के भुगतान संतुलन को मजबूत करेंगी।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए सरकार और आरबीआई को हालात पर नजर रखते हुए सोच-समझकर फैसले लेने होंगे।
महंगाई फिलहाल नियंत्रण में
संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल देश में महंगाई करीब 4% के आसपास है। हाल के महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से सप्लाई से जुड़ी समस्याओं के कारण हुई है। आरबीआई ने इस साल अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) 5.25% पर स्थिर रखी है, ताकि आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बना रहे। 
तेल की बढ़ती कीमतें बढ़ा सकती हैं चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं।
साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है।
ऐसे में अगर तेल महंगा होता है तो देश का आयात बिल बढ़ सकता है, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है।
जून में महंगाई 4.38% रही
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून में खुदरा महंगाई (CPI) 4.38% रही। यह आरबीआई के तय 2% से 6% के लक्ष्य दायरे के भीतर है, जिसका मध्य बिंदु 4% है। 
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। पहले यह अनुमान 4.6% था। केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन और कमोडिटी कीमतों पर असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।
अब बाजार की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक पर है, जो 3 से 5 अगस्त के बीच होगी। इस बैठक में मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। 
-Legend News

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