नई द‍िल्ली। राजेश एक्सपोर्ट्स लंबे समय से भारतीय शेयर बाजार में एक प्रमुख नाम रही है. कंपनी का दावा था कि वह दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी निर्यात कंपनियों में से एक है.

बेंगलुरु स्थित सालों तक राजेश एक्सपोर्ट्स भारत की सबसे सफल कंपनियों में गिनी जाती रही. कंपनी सोने और अन्य कीमती मेटल्स की रिफाइनिंग करती थी, दुनिया भर में जूलरी का निर्यात करती थी और उसकी सालाना आय अक्सर भारत की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल होती थी. लेकिन अब कंपनी की इस सफलता की कहानी पर गंभीर सवाल उठ गए हैं. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ जांच में आरोप लगाया है कि कंपनी समूह स्तर पर जितनी आय दिखा रही थी, उसका बड़ा हिस्सा वास्तविक रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों से सत्यापित नहीं किया जा सका.

सेबी की कार्रवाई के बाद शेयर लुढ़के, लगा लोअर सर्किट 
SEBI ने कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गया. सेबी ने कंपनी पर व्यापक वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग नहीं करने और राजस्व को बढ़ाकर दिखाने के आरोप लगाए हैं.

कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर बीएसई पर अपने पिछले बंद 110.15 रुपए की तुलना में गुरुवार को 4.99 प्रतिशत गिरकर 104.65 रुपए पर खुला, और शेयरों में लोवर सर्किट लग गया. शेयरों का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 239 रुपए और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपए है.
- Legend News

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