रिपोर्ट : LegendNews
राहुल गांधी ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मतदाता पंजीकरण से जुड़े ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर बृहस्पतिवार को निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा और सवाल किया कि इस बदलाव का आदेश आयोग में किसने दिया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि इसे लागू करने के लिए 'टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज' (TCS) में किस अधिकारी ने मंजूरी दी। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''ऑनलाइन फॉर्म-6 को अवैध रूप से बदला गया था, जैसा कि निर्वाचन आयोग के अपने आयुक्तों ने रिकॉर्ड में दर्ज किया है।''
उन्होंने सवाल किया, ''आयोग में किसने TCS को यह बदलाव करने का आदेश दिया? TCS में किसने इस पर हस्ताक्षर कर मंजूरी दी? और क्या उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डाला गया था?''
दरअसल, यह पूरा मामला ऑनलाइन फॉर्म-6 में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा को शामिल किए जाने को लेकर सामने आया है। फॉर्म-6 नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
अंग्रेजी दैनिक 'द इंडियन एक्सप्रेस' में पिछले दिनों प्रकाशित खबर में कहा गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आयोग के भीतर आपत्ति दर्ज की थी।
दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था।
आयोग का कहना है कि यह घोषणा SIR से संबंधित आदेशों के तहत अतिरिक्त आवश्यकता थी और मूल वैधानिक फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया।
आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा का इस्तेमाल SIR अवधि तक किया जाना है और इसके बाद की अवधि में निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। उसने कहा कि इसके बाद उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से यह अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई, जिनमें SIR पूरा हो चुका है।
जनता अब 'वोट चोरी' बर्दाश्त नहीं करेगी, 'इंडिया' गठबंधन भी कटिबद्ध: कांग्रेस
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के नागरिक अब किसी भी रूप में 'वोट चोरी' बर्दाश्त नहीं करेंगे और विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन भी संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने को प्रतिबद्ध है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ओ.पी. रावत के एक अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता ने रावत के हवाले से कहा कि आजादी के बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं का मताधिकार छिना है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के तहत करीब 14 करोड़ मतदाता पहले ही मताधिकार से वंचित हो चुके हैं।
रमेश ने रावत का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय निर्वाचन आयोग कभी ''विश्वसनीयता का स्वर्णिम मानक'' माना जाता था, लेकिन अब उसकी साख को बहुत नुकसान पहुंच चुका है। उन्होंने रावत के इस विचार का भी उल्लेख किया कि निर्वाचन आयोग के दो अन्य आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा लिए गए ''अवैध फैसलों'' को रोकने के लिए अधिक प्रयास करने चाहिए थे।
रमेश ने कहा कि निर्वाचन प्रणाली पर ''कब्जे'' के खिलाफ आवाजें लगातार तेज हो रही हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ''नागरिक अब किसी भी रूप में वोट चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे।'' कांग्रेस नेता ने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने को प्रतिबद्ध है। विपक्षी गठबंधन ने बुधवार को निर्वाचन आयोग मामले पर बैठक की थी और "वोट चोरी" के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।
-Legend News

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