रिपोर्ट : LegendNews
ED के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा, याचिका दायर
पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की।
अरोड़ा को 9 मई को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी प्रथम दृष्टया 'मनमानी, यांत्रिक, अधिकार क्षेत्र से परे और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत प्राप्त अनिवार्य सुरक्षा उपायों का उल्लंघन' है। उन्होंने अदालत से गुरुग्राम के सेशन विशेष जज द्वारा दिये गये रिमांड आदेश को रद्द करने की भी मांग की। इस आदेश के तहत उन्हें 16 मई तक ईडी की हिरासत में भेजा गया है।
यह याचिका अधिवक्ता विभव जैन, वीरेन सिब्बल और जसमन सिंह गिल के माध्यम से दायर की गई है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ के समक्ष होने की संभावना है।
मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए याचिकाकर्ता ने कहा कि वह Hampton Sky Realty Limited (HSRL) के प्रमोटर और चेयरमैन थे। कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 से मोबाइल फोन के निर्यात का कारोबार शुरू किया था, जो उसके वैध व्यापार विस्तार और विविधीकरण का हिस्सा था। सभी निर्यात लेनदेन पारदर्शी और पूरी तरह दस्तावेजी प्रक्रिया के तहत किए गए।
याचिका में कहा गया कि सार्वजनिक पद पर निर्वाचित होने के बाद अरोड़ा ने कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था और उसके दैनिक संचालन, प्रबंधन या व्यापारिक मामलों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
यह भी कहा गया कि बाद में हुई तलाशी कार्रवाई के दौरान कोई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, नकदी, अघोषित संपत्ति या अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई। ईडी अधिकारी 9 मई को तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के लिए उनके घर पहुंचे थे, जिसके बाद उनका बयान दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
अरोड़ा ने दावा किया कि गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह अस्पष्ट थे और उनमें ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं था जो यह साबित करे कि उन्होंने पीएमएलए के तहत कोई अपराध किया है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के मूलभूत तत्व साबित करने में विफल रही। जिन लेनदेन का हवाला दिया गया, वे “पूरी तरह दस्तावेजीकृत निर्यात लेनदेन” थे, जो नियमित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए और जिनके समर्थन में इनवॉइस, शिपिंग बिल, कस्टम जांच, बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट, जीएसटी रिटर्न और ऑडिटेड अकाउंट मौजूद हैं।
याचिका में कहा गया कि संबंधित रिकॉर्ड पहले ही एजेंसियों के कब्जे में थे, अरोड़ा से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई और हिरासत में पूछताछ या गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं थी।
-Legend News

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