प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सिर्फ तेल और ऊर्जा बचाने की अपील क्या की, राजनीतिक बहस छिड़ गई. लेकिन दुनिया की तरफ नजर घुमाइए, तो तस्वीर कहीं ज्यादा गंभीर दिखती है. करीब 40 देशों ने सिर्फ अपील नहीं, बल्कि सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं. कहीं गाड़ियों पर odd-even लागू है, कहीं पेट्रोल QR कोड से मिल रहा है, तो कई देशों में AC का तापमान सरकार तय कर रही है. 
‘कम गाड़ी चलाइए. जरूरी हो तभी यात्रा कीजिए. ऊर्जा बचाइए.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह अपील की तो बखेड़ा शुरू हो गया. कोई कह रहा क‍ि सरकार डर गई है. किसी ने कहा-तेल संकट आने वाला है. व‍िपक्ष ने तो इसे अघोषित इमरजेंसी तक बता दिया. लेकिन अगर दुनिया की तरफ नजर घुमाएं, तो कहानी बिल्कुल अलग दिखती है. असलियत यह है कि भारत ऐसा करने वाला अकेला देश नहीं है.IEA Tracker के मुताबिक- दुनिया के करीब 40 देशों ने तो पेट्रोल-डीजल बचाने के ल‍िए वाहन चलाने पर पाबंदी तक लगा दी है. लोगों से सफर कम करने, ब‍िजली की बचत करने और ऑफिस वर्क कल्चर बदलने का बकायदा आदेश दे द‍िया है. कुछ देश तो इससे भी आगे चले गए हैं.फ्यूल राशनिंग कर रहे हैं.हफ्ते में स‍िर्फ चार द‍िन ऑफ‍िस खोल रहे हैं.अनिवार्य वर्क फ्रॉम होम दे द‍िया है. इतना ही नहीं, पेट्रोल बांटने पर लिमिट लगा दी गई है. एसी पर ताला लटकाया जा रहा है. यानी जो भारत में सख्ती लग रही है, वह दुन‍िया में न्‍यू नॉर्मल बन चुका है. क्योंकि दुनिया का एनर्जी स‍िस्‍टम एक साथ कई झटकों से गुजर रहा है.
मध्य पूर्व में तनाव, स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, शिपिंग लागत में उछाल, LNG सप्लाई दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सप्‍लाई चेन टूट चुका है. इन सबने मिलकर दुनिया को एक नए ऊर्जा असुरक्षा दौर में धकेल दिया है. स्थिति यह है कि कई देशों को डर है कि अगर सप्लाई कुछ हफ्तों के लिए भी प्रभावित हुई, तो तेल कीमतें विस्फोटक हो सकती हैं. बिजली संकट पैदा हो सकता है और घरेलू अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है. यानी सरकारें अब सिर्फ तेल खरीदने की नहीं, तेल बचाने की राजनीति कर रही हैं. 
कहां कहां क्‍या हुआ 
पाक‍िस्‍तान: भारत में अगर वर्क फ्रॉम होम की अपील हुई, तो बहस शुरू हो गई. लेकिन पड़ोसी पाकिस्तान इससे काफी आगे जा चुका है.ऊर्जा संकट से जूझते पाकिस्तान ने 4 दिन का वर्क वीक लागू कर द‍िया है. 50% रिमोट वर्क हो रहा है. विदेशी यात्राओं पर रोक है. रात 8 बजे बाजार बंद हो रहे हैं और सरकारी मीटिंग्स सीमित हो गई हैं. यानी सरकार मान चुकी है क‍ि एनर्जी बचाने का यही व‍िकल्‍प है. 
श्रीलंका: भारत के एक और पड़ोसी श्रीलंका ने तो स्कूल तक बंद कर दिए. कई सरकारी दफ्तरों में ताला लटक गया.बुधवार को जबरन सार्वजन‍िक छुट्टी घोषित कर दी गई. तमाम स्कूलों का शेड्यूल बदला गया और ईंधन QR कोड सिस्टम से मिलने लगा. लोग घंटों लाइन में खड़े रहते थे. देश ने वह दौर देखा जब पेट्रोल पंपों पर सेना तक तैनात करनी पड़ी.
जॉर्डन: गाड़‍ियां चलाने पर रोक बार बार लगाई जा रही है.है. लोगों से कार पूल करने को कहा जा रहा है. ऑफ‍िसों में गाड़‍ियां कम करने को सरकार ने आदेश द‍िए हैं. स्‍कूल पर भी पाबंद‍ियां लगाई जा रही हैं.
मिस्र, इंडोनेश‍िया, मलेश‍िया, कोर‍िया, पनामा, तंजान‍िया समेत कई देशों में ट्रैवल बैन लागू क‍िया जा चुका है. साउथ एश‍िया के कई देशों में पेट्रोल डीजल देने पर रोक लगाई जा रही है ताक‍ि लोग घर से गाड़ी ही न न‍िकाल पाएं. 
बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया… सबने AC पर कैंची चलाई 
बांग्लादेश ने ऑफिस AC को 25°C पर सीमित किया
मलेशिया ने 24°C नियम लागू किया
थाईलैंड और श्रीलंका ने 26°C सेटिंग तय की
जॉर्डन ने सरकारी दफ्तरों में AC पर रोक लगा दी.
सिंगापुर ने तो लोगों से कहा- फैन ज्यादा चलाइए, AC कम.
18 देशों ने ट्रांसपोर्ट पर लगाई पाबंदी
ऊर्जा संकट का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ा. 18 देशों ने ट्रांसपोर्ट पर पाबंदी लगा दी है. कई देशों ने Odd-even सिस्टम लागू कर द‍िया. फ्यूल राशनिंग कर दी, यानी पेट्रोल डीजल खरीदने की ल‍िम‍िट तय कर दी.यहां तक क‍ि वाहन चलाने की स्‍पीड पर भी ल‍िमिट तय कर दी गई. सरकारी बसों-ट्रेनों में चलने की अपील की जा रही है. इलेक्‍ट्र‍िक वाहन खरीदने पर अलग से इंसेट‍िव द‍िया जा रहा है. 
जैसे दक्षिण कोरिया में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए odd-even driving लागू.
श्रीलंका में QR code से पेट्रोल डीजल दिया जा रहा है, वो भी ल‍िम‍िट में.
म्यांमार में एक द‍िन छोड़कर एक द‍िन गाड़ी चलाने को कहा गया है.
पाकिस्तान में सरकारी बसों से सफर मुफ्त कर द‍िया गया है.
बांग्लादेश ने पेट्रोल डीजल देने की ल‍िम‍िट तय कर दी है.
यानी सरकारें सीधे नागरिकों की गाड़ी न चलाने को कह रही है.
और भारत क्या कर रहा है?
भारत फिलहाल उस स्तर पर नहीं पहुंचा है जहां राशनिंग करनी पड़े. या यात्रा प्रतिबंध लगाने पड़ें. लेकिन सरकार साफ तौर पर तैयारी नजर आ रही है. पीएम मोदी की ऊर्जा बचाने और अनावश्यक यात्रा कम करने की अपील उसी दिशा का संकेत मानी जा रही है.क्योंकि भारत की सबसे बड़ी कमजोरी यही है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. और अगर होर्मुज संकट बढ़ता है, तेल 120-150 डॉलर तक जाता है या सप्लाई बाधित होती है तो भारत पर भारी दबाव आ सकता है. इसलिए पीएम मोदी कह रहे क‍ि तेल बचाओ ताक‍ि ज्‍यादा तेल न खरीदना पड़े. 
सरकारें चला रहीं मुह‍िम 
सरकारें लोगों को जागरूक करने के ल‍िए मुह‍िम चला रही हैं. ऑफ‍िस में ब‍िजली कम खर्च करने को कहा जा रहा है. सरकारी अध‍िकार‍ियों की यात्राओं में कटौती की जा रही है. अफसरों नेताओं के साथ अब फ्लीट नहीं जाती. स‍िर्फ एक गाड़ी जा रही. डिजिटल मीटिंग्स फिर से बढ़ाई जा रही हैं.
ऑस्ट्रेलिया ने Every Little Bit Helps अभियान शुरू किया. इसके तहत लोगों से अपील की गई कि वे छोटी-छोटी आदतें बदलकर ऊर्जा बचाएं- जैसे अनावश्यक लाइट बंद करना, AC कम चलाना, कम ड्राइव करना और बिजली उपकरणों का सीमित इस्तेमाल करना, आद‍ि स‍िखाया जा रहा है.
दक्षिण कोरिया ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों और वैश्विक तेल संकट के बीच राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बचत अभियान चलाया. सरकार ने लोगों से अनावश्यक बिजली इस्तेमाल कम करने, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करने, ऑफिसों में AC सीमित रखने और इस्तेमाल न होने पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करने की अपील की.सार्वजनिक संस्थानों में भी बिजली खपत घटाने के निर्देश दिए गए.
सिंगापुर ने बढ़ती ऊर्जा लागत और वैश्विक संकट के बीच “Let’s Save Energy Together” अभियान शुरू किया। इसके तहत लोगों को बिजली बचाने, ऊर्जा-कुशल उपकरण अपनाने, AC का सीमित इस्तेमाल करने और घरों में बिजली खपत घटाने के लिए जागरूक किया गया. सरकार ने बिजनेस सेक्टर और परिवारों के लिए एनर्जी एफ‍िश‍िएंसी योजनाओं और क्लाइमेट वाउचर स्कीम को भी बढ़ावा दिया. 
गैस स‍िलेंडर पर ब्रेक…
मालदीव और नेपाल में अब स‍िर्फ आधे सिलेंडर भरकर द‍िए जा रहे हैं ताक‍ि सबको गैस म‍िल सके.
कुछ देशों ने PNG और इलेक्‍ट्र‍िक अल्‍टरनेट‍िव को बढ़ावा द‍िया है ताक‍ि गैस की बचत की जा सके.
ब्र‍िटेन ने LPG से चलने वाले वॉटर पंप छोड़ने पर ज्‍यादा सब्‍स‍िडी देने का ऐलान कर द‍िया है.
भारत अभी भी अच्‍छी स्‍थ‍ित‍ि में…
भारत की स्थिति अभी श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी नहीं है. भारत के पास बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार है. रणनीतिक तेल भंडार है और ऊर्जा के कई स्रोत हैं. लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. क्योंकि असली डर सिर्फ तेल का नहीं असल चिंता यह है कि अगर मध्य पूर्व में बड़ा संघर्ष हुआ. होर्मुज कभी न खुला, या सप्लाई चेन टूट गई तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी. यानी यह सिर्फ पेट्रोल महंगा होने की कहानी नहीं है. यह महंगाई, फूड सप्लाई, ट्रांसपोर्ट, एयरलाइंस और रोजमर्रा की जिंदगी सबको प्रभावित कर सकता है. 
-Legend News

मिलती जुलती खबरें

Recent Comments

Leave A Comment

Don’t worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).