बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को चेतावनी दी है कि फासीवाद राज के बाद बांग्लादेश में बेवजह विवाद और अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं और अनजाने में ही सत्ता से बेदखल की गईं तानाशाही ताकतों की वापसी का रास्ता साफ कर सकती हैं। उन्होंने सभी से ऐसे कामों के नतीजों पर गंभीरता से सोचने का आग्रह किया है। उनका ये बयान उस वक्त आया है जब शेख हसीना आज कुछ घंटों में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली हैं। इस दौरान वो बांग्लादेश वापसी की घोषणा करने जा रही हैं।
तारिक रहमान ने ढाका में कहा 'मैं आज लोगों का ध्यान एक मुद्दे की ओर दिलाना चाहता हूं। फासीवाद से मुक्त हुए बांग्लादेश में कुछ लोग बेवजह के मुद्दे खड़े करके देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। हमें इस बात पर विचार करना होगा कि क्या ऐसे काम, जान-बूझकर या अनजाने में, उन तानाशाही ताकतों की वापसी में मदद कर रहे हैं जिन्हें हराया गया, सत्ता से हटाया गया और जो भाग गई थीं।' 
तारिक रहमान किन लोगों पर लगा रहे आरोप?
तारिक रहमान ने ये बातें ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर में 'जुलाई मास अपराइजिंग डे' के मौके पर 'जुलाई मास अपराइज़िंग मेमोरियल म्यूज़ियम' का उद्घाटन करने के बाद 'जुलाई 36' नाम की चर्चा को संबोधित करते हुए कहीं। तारिक रहमान ने सुबह करीब 9 बजे जातीय संसद भवन के उत्तरी हिस्से में स्थित गनोभवन (पूर्व प्रधानमंत्री का आवास) में 'जुलाई जन-विद्रोह स्मारक संग्रहालय' का औपचारिक उद्घाटन किया।
यह संग्रहालय 2024 के जुलाई महीने में हुए जन-विद्रोह की यादों को संजोने के लिए बनाया गया है। यहां शेख हसीना रहती थीं। अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस भी इस दौरान विशेष अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में मौजूद थे। 
शेख हसीना के बयान का क्या मतलब हो सकता है?
बांग्लादेश की राजनीति पर नजर रखने वाले जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि राजनीतिक रूप से तारिक रहमान शेख हसीना की वापसी से डरे नहीं हैं क्योंकि उनकी सरकार के पास देश में भारी बहुमत है। लेकिन वो इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि हसीना की वापसी या उनके वर्चुअल भाषण देश के माहौल को दोबारा हिंसक या अस्थिर न बना दें। तारिक रहमान जानते हैं कि शेख हसीना के पास अभी भी भारी जन समर्थन है और जिस तरह से शेख हसीना की सरकार को हिंस तरीके से सत्ता से बेदखल किया गया था वैसी कोशिश शेख हसीना के समर्थक भी कर सकते हैं। 
हालांकि रहमान सरकार बार बार शेख हसीना को भारत सौंपे जाने की मांग कर रहे हैं ताकि उन पर दर्ज हत्याओं और विद्रोह के मामलों जिनमें उन्हें मौत की सजा भी मिल चुकी है, उनका सामना करवाया जाए। लेकिन एक्सपर्ट्स सवाल उठाते हैं कि क्या तारिक रहमान देश की पूर्व प्रधानमंत्री, वो भी एक महिला को फांसी देंगे? ये आसान नहीं होगा। तारिक रहमान शेख हसीना को जेल में डाल सकते हैं लेकिन बांग्लादेश में शेख हसीना का होना उनके समर्थकों के लिए आत्म विश्वास बढ़ाने वाला होगा और शेख हसीना नहीं भी तो उनकी पार्टी की आगामी चुनावों में वापसी हो सकती है। 
-Legend News 

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