प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड में देश को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने महाभारत, द्वितीय विश्व युद्ध, कुरुक्षेत्र की अपनी यात्रा, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और भारत की करुणा-परंपरा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे भारत ने हमेशा दुनिया को शांति, करुणा और मानवता का संदेश दिया है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र का जिक्र किया, जहां उन्होंने हाल ही में 25 नवंबर को दौरा किया। उन्होंने बताया कि महाभारत का युद्ध यहीं हुआ था और आज डिजिटल तकनीक की मदद से महाभारत अनुभव केंद्र में 3D, लाइट एंड साउंड शो और आधुनिक तकनीक के जरिए पूरी कथा को बहुत जीवंत तरीके से दिखाया जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें गहरा आनंद दिया।
इसके बाद उन्होंने ब्रह्म सरोवर, कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने को अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों-यूरोप, सेंट्रल एशिया सहित कई क्षेत्रों के लोग गीता से प्रेरित हो रहे हैं और बड़ी संख्या में इस महोत्सव में हिस्सा ले रहे हैं। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति हुई। यूरोप के लातविया में भी एक महत्वपूर्ण गीता महोत्सव आयोजित किया गया, जिसमें लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में उन्होंने भारत की करुणा परंपरा पर प्रकाश डालते हुए द्वितीय विश्व युद्ध का भी जिक्र किया। मोदी ने कहा कि जब दुनिया युद्ध और विनाश से घिरी थी, तब गुजरात के नवानगर के जाम साहब-महाराजा दिग्विजय सिंह ने पोलैंड के यहूदी बच्चों की रक्षा कर मानवता की मिसाल पेश की। उन्होंने किसी सैन्य रणनीति के बजाय उन बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, जिसका संदेश आज भी दुनिया को प्रेरित करता है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की संस्कृति में शांति, करुणा और मानवता हमेशा सर्वोच्च रही है और ये परंपराएँ आज भी दुनिया को दिशा दिखा रही हैं। 
काशी-तमिल संगमम 4.0 में शामिल होने की अपील 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज काशी-तमिल संगमम 4.0 में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे पुरानी भाषा तमिल और दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में से एक वाराणसी का संगम हमेशा अद्भुत और प्रेरणादायक होता है। चौथा काशी–तमिल संगमम 2 दिसंबर से काशी के नमो घाट पर शुरू हो रहा है और इस बार की थीम ‘Learn Tamil तमिल करकलम्’ रखी गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि काशी-तमिल संगमम उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है जिन्हें तमिल भाषा और संस्कृति से प्रेम है। उन्होंने बताया कि काशी के लोगों से बात करने पर अक्सर यह सुनने को मिलता है कि उन्हें इस आयोजन में शामिल होकर नए अनुभव मिलते हैं और तमिलनाडु से आने वाले लोगों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि वे इस बार भी काशी-तमिल संगमम में अवश्य शामिल हों और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि काशीवासी पूरे जोश के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई–बहनों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे और मंचों के बारे में भी सोचने का आग्रह किया जो देश की एकता और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाएं।
इस बीच काशी-तमिल संगमम (KTS) 4.0 के लिए छात्रों का पहला दल शनिवार को कन्याकुमारी से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। इस दल में कन्याकुमारी के 43, तिरुचिरापल्ली (TPJ) के 86 और चेन्नई एग्मोर (MS) के 87 छात्र शामिल हैं। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के ये छात्र वाराणसी में होने वाली सांस्कृतिक, शैक्षणिक और अनुभवात्मक गतिविधियों में भाग लेकर दोनों क्षेत्रों के बीच प्राचीन सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेंगे। 
-Legend News

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