रिपोर्ट : LegendNews
पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने कहा: पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह सिंधु जल संधि से बाहर निकल जाए
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बीते एक साल से ज्यादा समय से तनाव बना हुआ है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि पर रोक लगा दी है, जिसके बाद से पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत पानी के बहाव को रोक रहा है, जिसके चलते पंजाब प्रांत में खेती खराब हो रही है। इस बीच पाकिस्तान के एक्सपर्ट सिंधु जल समझौते पर ही सवाल उठाए हैं और इस्लामाबाद को इससे निकलने की सलाह दी है।
पाकिस्तान के जल विज्ञान और जल संसाधनों के एक्सपर्ट हसन अब्बास ने सिंधु जल संधि (IWT) को पूरी तरह भारत के पक्ष में लिखी गई बताया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन में लिखे लेख में उन्होंने कहा कि मूल सवाल है कि पाकिस्तान को IWT से आखिर क्या मिला और अब उसके पास खोने के लिए क्या बचा है।
भारत पर पूर्वी नदियों को पास रखने का आरोप
अब्बास ने लिखा कि 1948 में भारत ने पाकिस्तान के लिए सिंचाई नहरें बंद कर दी। यह संकट 1960 में खत्म हआ, जब सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अपना यह रुख कभी नहीं बदला कि पूर्वी नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज- उसकी हैं। पाकिस्तान से कहा गया कि वह इन नदियों पर अपनी निर्भरता खत्म करके पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम, चिनाब- के पानी का इस्तेमाल करे।
पाकिस्तान के लिए सिंधु जल संधि घाटे का सौदा
अब्बास ने कहा कि पाकिस्तान को संधि से ऐसा कुछ नहीं मिला, जो संधि के खत्म होने पर उससे छिन जाएगा। उन्होंने संधि के मूल पाठ में ही भारत के फायदों का साफ उल्लेख बताया और कहा कि पूर्वी नदियों पर भारत का विशेषाधिकार है। पाकिस्तान का हिस्सा शून्य है।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने आगे कहा कि पश्चिमी नदियां पाकिस्तान के हिस्से में गईं, लेकिन भारत को इन पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाने का असीमित अधिकार मिला। उन्होंने बताया कि भारत ने पानी की हर बूंद को अपने पास रखा जिसे वह मोड़ सकता था। पाकिस्तान को केवल वही पानी मिला, जिसे भारत मोड़ने में सक्षम नहीं था। ऐसा इन नदियों के भौगोलिक इलाके की वजह से हुआ।
भारत के पानी देने पर भी रोया दुखड़ा
उन्होंने पश्चिमी नदियों को पाकिस्तान के हिस्से में आना भारत की मजबूरी बताया। उन्होंने कहा कि ये नदियां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से होकर पाकिस्तान में पहुंचती हैं। इस इलाके में बड़े पैमाने पर पानी को मोड़ना या उसका भंडारण करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संधि भारत को 3 मिलियन एकड़ फीट से ज्यादा पानी मोड़ने का जमा करने की इजाजत देती हैं, फिर भी 65 साल में ऐसा नहीं किया गया क्योंकि ऐसा किया नहीं जा सकता।
इसके मुकाबले पूर्वी नदियों समतल जलोढ़ मैदान पर बनी सीमा से गुजरती हैं, जहां पानी मोड़ना सस्ता या आसान है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संधि भारत को सारा पानी लेने देती है, जो लिया जा सकता है। पाकिस्तान को वही पानी मिलता है, जो भारत नहीं ले सकता।
पाकिस्तान को संधि से बाहर निकलने की सलाह
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह इस संधि से बाहर निकल जाएगा। इसके समर्थन में तर्क दिया कि पाकिस्तान को आज जो पानी मिल रहा है, वह आगे भी मिलता रहेगा। संधि से बाहर निकलने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय जल पर बर्लिन नियम 2024 के तहत पर्यावरण और मानवाधिकारों पर अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने भारत पर नदियों में प्रदूषण फैलाने का बेबुनियाद आरोप लगाया और कहा कि इसका पाकिस्तान पर हो रहा है।
-Legend News

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