रिपोर्ट : LegendNews
पाक ने छठा मोर्चा खोला, मक्का रक्षा समझौते के बावजूद कई टुकड़ों में बिखर जाएगा जिन्ना का देश
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने पिछले हफ्ते 'मक्का रक्षा समझौता' किया है। इसको लेकर कई जानकारों का मानना है कि इस त्रिपक्षीय समझौते का मकसद अशांत मध्य-पूर्व क्षेत्र में ईरान और इजरायल के 'दबदबे' को रोकना है। लेकिन भारत का पाकिस्तान से लगातार तनाव बना रहता है लिहाजा भारत में सवाल ये है कि इस समझौते से उसके लिए किस तरह की परेशानी उत्पन्न हो सकती है। पाकिस्तान भले ईरान युद्ध में मध्यस्थता की कोशिशों के चलते हेडलाइंस में बना है लेकिन उसके घरेलू हालात डरावने हैं।
पाकिस्तान के लिए खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान पहले ही खतरनाक रहे हैं और अब पीओके भी देश की सरकार के सामने एक समस्या बन गया है। ऐसे में सवाल यह है कि पाकिस्तान इन तीन क्षेत्रों को कब तक और किस कीमत पर अपने नियंत्रण में रख पाएगा। यूरेशियन टाइम्स के एक लेख में जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट नितिन जे टिकू ने लिखा है कि अंदरूनी बदहाली के बावजूद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ एक रक्षा समझौता किया है।
पाकिस्तान 'छह मोर्चों' वाले संघर्ष में फंसा
जिसका मतलब है कि उसे देश के बाहर भी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। वो युद्ध या तो यमन के हूतियों से हो सकता है या फिर ईरान से। कुल मिलाकर स्थिति ये है कि पाकिस्तान ने अपने लिए छठा मोर्चा खोल लिया है। 1- भारत, दूसरा- बलूचिस्तान, तीसरा- खैबर पख्तूनख्वा, चौथा- पीओके, पांचवां- अफगानिस्तान और छठा- ईरान और ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूह जैसे हूती विद्रोही।
नितिन जे टिकू ने लिखा है कि पिछले साल मई में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान के डिफेंस सिस्टम की पोल खोल दी थी। भारत ने न सिर्फ हमलों के पहले दौर में पाकिस्तानी सुरक्षा घेरे को तोड़कर कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि सटीक हमले करके पूरे देश में पाकिस्तान के अहम सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नुकसान पहुंचाया।
सैटेलाइट तस्वीरों से पाकिस्तान में भारी नुकसान की पुष्टि हुई जिसमें रनवे, हैंगर, कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर का नष्ट होना और 14 तक विमानों और जमीन पर मौजूद कई कर्मियों का नुकसान शामिल था। पाकिस्तान ने भी कई भारतीय जेट्स को मार गिराने का दावा किया लेकिन वो साबित नहीं कर पाया। पाकिस्तान S-400 के नेतृत्व वाले भारतीय एयर डिफेंस नेटवर्क को भेदने में नाकाम रहा।
पाकिस्तान और तुर्की पहले से ही मजबूत स्थिति में
नितिन जे टिकू के मुताबिक तुर्की पहले से ही NATO का सदस्य है और मिलिट्री के मामले में शायद सबसे ताकतवर इस्लामिक देश है। अपनी सुरक्षा के लिए उसे असल में पाकिस्तान या सऊदी अरब की जरूरत नहीं है। तुर्की के सामने कोई लड़ाई है भी नहीं। दूसरी तरफ सऊदी अरब को ईरान और हूती विद्रोहियों से काफी नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन जब अमेरिका ही उसकी पूरी तरह से रक्षा नहीं कर सका तो पाकिस्तान और तुर्की क्या कर सकते हैं?
इसीलिए पाकिस्तान के मामले में सबसे कमजोर स्थिति में है। पाकिस्तान जो एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अपने एयरबेस की मरम्मत कर रहा है उसके इस समझौते का मकसद भारत को एक कड़ा संदेश देना है। भारत ने देश पर किसी भी आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर को फिर शुरू करने की कसम खा रखी है।
भारत ने तुर्की को दिया जैसे को तैसा जवाब
भारत ने तुर्की के विरोधी देशों जैसे ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ मजबूत सैन्य संबंध बना लिए हैं। इजरायल के साथ भी भारत के मज़बूत सैन्य संबंध हैं। हो सकता है कि कागज पर कोई औपचारिक समझौता न हो लेकिन भारत-इजरायल के संबंध किसी भी दिखावटी समझौते से कहीं ज्यादा गहरे हैं।
इसीलिए इसमें कोई शक नहीं कि मक्का समझौता पाकिस्तान को इस्लामी दुनिया के व्यापक सुरक्षा ढांचे में शामिल करता है। लेकिन उसके लिए बचना करीब करी नामुमिकन है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत बलूचिस्तान अपनी आजादी के लिए लड़ रहा है और यही स्थिति बनी रही तो इससे पहले की सऊदी और तुर्की उसे बचाने आए पाकिस्तान कई टुकड़ों में टूट जाएगा।
-Legend News

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