सिंधु जल संधि पर अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की फजीहत हो गई है। इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी आयोजकों ने कई अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था लेकिन एक भी अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ नहीं पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन में हुई एक पॉलिसी बातचीत में ज्यादातर पाकिस्तानी लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े झगड़ों को 'सिंधु जल संधि' (IWT) से पीछे हटने का बहाना नहीं बनाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान जो प्रोपेगेंडा फैला रहा है उसमें उसे बड़ा झटका लगा है।
रिपोर्ट के मुताबिक 28 और 29 अगस्त को इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस बातचीत के दौरान पाकिस्तानी वक्ताओं ने तर्क दिया कि पानी के बंटवारे की व्यवस्था को राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े झगड़ों से अलग रखा जाना चाहिए और संधि की शर्तों के आधार पर ही सिंधु नदी प्रणाली का प्रबंधन जारी रहना चाहिए। वहीं 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि राजनीतिक तनावों के कारण उस समझौते को कमजोर नहीं होने देना चाहिए जो पाकिस्तान और भारत के बीच युद्धों और बार-बार आए संकटों के बावजूद कायम रहा है। 
अमेरिकी बैठक में नहीं पहुंचे अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ
अमेरिका की राजधानी में चर्चा आयोजित करके इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की गंभीर कोशिशों के बावजूद वह किसी भी जल या अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ को इसमें शामिल करने में नाकाम रहा। इनमें से कोई भी इसके किसी सत्र में शामिल नहीं हुआ। बोस्टन यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर जरूर इसमें शामिल हुए थे लेकिन वो भी लाहौर यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर आदिल नजम थे।
इस कार्यक्रम के फ्लॉप होने के बाद यही पता चलता है कि कोई भी अंतर्राष्ट्रीय मंच सिंधु जल संधि के मुद्दे को उठाने को तैयार नहीं है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने एक निष्पक्ष अंतर्राष्ट्रीय तंत्र बनाने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया, जिसमें UN की भी भूमिका हो सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पाकिस्तान को चीन से भी सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि चीन इस मामले के नतीजे को प्रभावित करने की स्थिति में है। 
विश्व बैंक पहले ही खारिज कर चुका है मध्यस्थता की बात
विश्व बैंक के प्रमुख अजय सिंह बंगा ने कई बार सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के उन तर्कों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि बैंक को भारत और पाकिस्तान के बीच दखल देना चाहिए। उन्होंने साफ कर दिया था कि उन्हें किसी द्विपक्षीय मुद्दे में बैंक की कोई भूमिका नहीं दिखती।
वॉशिंगटन में हुई बातचीत में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि संधि के कानूनी और संस्थागत ढांचे को बनाए रखना जरूरी है। हिस्सा लेने वालों ने कहा कि यह संधि युद्धों, संकटों और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनावों के बावजूद कायम रही है और इसने पानी से जुड़े सहयोग को विवादों से अलग रखने में मदद की है। 
-Legend News

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