बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संगठन की नई ढांचा खड़े करने के पहले अनुशासन का डंडा चलाना शुरू कर दिया। एक मछली तालाब को गंदा कर देता है, इस मुहावरे को ध्यान में रख कर नीतीश कुमार ने उन तमाम लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन की समग्रता के बाद ही जदयू समर्पित कार्यकर्ताओं को साथ ले कर संगठन को नया रूप दिया जाएगा।
क्यों हो रही है ये कार्रवाई?
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान कई स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों का विद्रोह सामने आया था। सीट बंटवारे में जब कुछ सीट साथी दलों के लिए छोड़ दिया गया। तो उस स्तर पर भी पार्टी के भीतर विरोध की स्वर उठी थी। इसके बाद विरोध तब गहराया जब जदयू ने उम्मीदवार के नाम की घोषणा की गई। इस विरोध पर काबू पाने में घोषित उम्मीदवार के अपने तंत्र,संगठन के तंत्र और अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी अपील कर विद्रोह पर नियंत्रण पा लिया। फिर भी कुछ विधानसभा में भीतरिया विरोध चालू रहा। समय समय पर इसकी समीक्षा भी हो रही थी। लेकिन जब चुनावी जंग में जो जदयू के नेता ने विरोध का परचम थामे रखा जदयू ने उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की और जब भीतरिया विद्रोह का सबूत हासिल हुआ इसके बाद कार्रवाई हुई।
कौन थे ये लोग?
जनता दल (यूनाइटेड) ने संगठन के भीतर अनुशासनहीनता के खिलाफ अनुशासन का डंडा खूब चलाया है। जदयू की जांच टीम ने 12 प्रमुख नेताओं को पार्टी से छह साल के बाहर का रास्ता दिखाया है। इन नेताओं पर बिहार विधानसभा आम चुनाव-2025 के दौरान पार्टी और गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों के विरुद्ध कार्य करने का गंभीर आरोप लगा था जिसे पार्टी की जांच टीम ने सही पाया और उन 12 नेताओं को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। इनमें अशोक सिंह, रामदास सदा, संजीव कुमार सिंह, संजय कुशवाहा, कमला दशहरा, प्रिंस, अविनाश, लाल देव, गोपाल शर्मा, महेंद्र सिंह, दास मुर्तजा शोधकर्ता, अमित कुमार और मो. जमीलुर्रहमान का नाम शामिल है।
कार्रवाई के बहाने
जदयू की टीम की अनुशासनात्मक कार्रवाई के पीछे सबसे बड़ा मकसद है कि पार्टी के भीतर इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगे। दूसरा पहलू यह है कि अभी राज्य भर में सदस्यता अभियान चल रहा है,इसके पहले दागदार लोगों को पार्टी से बाहर निकाले । ऐसे तत्व पार्टी के भीतर रह गए तो पार्टी ने विभीषण की तरह काम कर विद्रोहियों की नई टीम खड़ा कर लेंगे।
तीसरा बड़ा कारण है कि संगठन के चुनाव के पहले ऐसे सभी विद्रोहियों को निकाल कर ही नए संगठन का गठन करें। संगठन भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा होना है। चौथा कारण है कि इन विद्रोहियों को नहीं निकाले जाएंगे तो राज्य सरकार के योजनाओं का पंचायत स्तर तक का मॉनिटरिंग नहीं होगा। नए आने वाले नेता नीतीश की योजनाओं का मॉनिटरिंग भी करेंगे।
-Legend News

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