रिपोर्ट : LegendNews
OPEC+ ने लिया कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोत्तरी का एलान, भारत को भी फायदा
तेल उत्पादक समूह OPEC+ ने रविवार को जून महीने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन कोटा में बढ़ोत्तरी का एलान किया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब यूएई ने हाल ही में संगठन से बाहर होने का निर्णय लिया है। OPEC+ के सात सदस्य देशों (अल्जीरिया, इराक, कजाकिस्तान, कुवैत, ओमान, रूस और सऊदी अरब) ने जून में संयुक्त रूप से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है। इससे भारत में भी तेल का आयात बढ़ सकता है।
OPEC+ के अनुसार यह वृद्धि तेल बाजार की स्थिरता बनाए रखने की उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। पिछले सप्ताह यूएई ने उत्पादन कोटे को लेकर लंबे समय से चल रही असहमति के बाद ओपेक (OPEC) और ओपेक+ दोनों समूहों से हटने की घोषणा की थी जो शुक्रवार से प्रभावी हो गई है।
कई चुनौतियां अभी बाकी
विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोत्तरी पहले से अनुमानित थी। यूएई के हिस्से को छोड़कर मार्च और अप्रैल में भी इसी तरह करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोत्तरी की गई थी।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि उत्पादन कोटे में यह वृद्धि केवल कागजों तक सीमित रह सकती है। इसका कारण यह है कि कई सदस्य देश पहले से ही अपने तय स्तर से कम उत्पादन कर रहे हैं।
होर्मुज संकट का असर
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया था। इसके बाद खाड़ी में तनाव पैदा हो गया। इस युद्ध के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी कर दी। इस नाकेबंदी की वजह से तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और खाड़ी देशों की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा फिलहाल वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है।
OPEC+ का दोहरा संदेश
रिस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) के विश्लेषक जोर्ज लियोन के अनुसार ओपेक+ देशों का यह फैसला सिर्फ उत्पादन बढ़ाने का नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है। इस फैसले के जरिए ओपेक+ दो बातें कहना चाहता है:
यूएई के जाने से समूह के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
युद्ध के कारण तेल व्यापार में भारी बाधा के बावजूद वैश्विक तेल बाजार पर OPEC+ का प्रभाव अभी भी कायम है।
भारत पर ओपेक+ के फैसले का क्या असर?
ओपेक+ द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले और यूएई के इस समूह से बाहर निकलने का भारत पर प्रभाव काफी मिला-जुला और महत्वपूर्ण होगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए खाड़ी देशों में होने वाली हर हलचल हमारी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है। यूएई के बाहर निकलने के बाद भी समूह का सक्रिय रहना कीमतों को बेकाबू होने से रोक सकता है। भारत के लिए कच्चे तेल की स्थिर कीमतें पेट्रोल और डीजल के दामों को नियंत्रण में रखने में मदद करेंगी।
-Legend News

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