रिपोर्ट : LegendNews
सती हरिमतीजी के पुण्यस्मृति पर्व पर सतीसमाधि पर पूजा व श्रीहरिदासपीठ में हुई श्रद्धांजलि सभा
वृन्दावन। सेवाभावी संस्था श्रीहरिदासबिहारी फाउंडेशन भारत ट्रस्ट के तत्वावधान में आज शनिवार को संगीतसम्राट रसिकशिरोमणि श्रीस्वामीहरिदासजी महाराज की धर्मपत्नी सती हरिमतीजी का 499 वां पुण्यस्मृति पर्व परम्परानुसार मनाया गया। प्रतिवर्ष भाद्रप्रद शुक्ला प्रतिपदा (पड़वा) के दिन आयोजित होने वाले सती स्मृति पर्व के अंतर्गत प्रातः काल सतीसमाधि पर पूजा - अर्चना एवं मध्यान्हकाल में प्राचीन श्रीहरिदासपीठ मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर ट्रस्ट संस्थापक इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने वृन्दावन में विद्यापीठ चौराहे के निकट स्थापित सती हरिमतीजी के समाधिस्थल का गंगाजल, यमुनाजल, गुलाबजल व इत्र से अभिषेक करने के बाद रोली, चावल, चंदन आदि से विधिवत पूजन अर्चन किया। तत्पश्चात सतीजी को सुहाग की निशानी हरे रंग की चूड़ियाँ, लाल रंग की ओढ़नी, बिंदी, सिंदूर एवं भेंट इत्यादि अर्पित करके भोग धराया गया तथा सती दिवस की विशेष आरती उतारी गई।
सती स्मृतिपर्व की मध्यान्हकालीन बेला में बिहारीजी की मुख्यगली स्थित प्राचीन श्रीहरिदासपीठ मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। सभा में अध्यक्ष पद से विचार व्यक्त करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधुरबिहारी गोस्वामी ने कहा कि सती हरिमतीजी भक्तिमहारानी की अवतार थीं, उन्होंने पतिव्रत धर्मपालन के सर्वोच्च सोपान स्थापित किए।
ठाकुर श्रीबाँकेबिहारी महाराज के सेवायत आशुकवि आचार्य प्रेम बल्लभ गोस्वामी ने कहा कि सती हरिमतीजी युगों युगों तक नारी शक्ति की प्रेरणाश्रोत बनी रहेंगी, इतिहास उन्हें विस्मृत नहीं कर सकता। कार्यक्रम में सतीश बघेल, विप्रांश गोस्वामी व छोटू बघेल का सहयोग उल्लेखनीय रहा। संचालन संस्था के महासचिव रविंद्र तंवर ने किया।
दुर्दशा का शिकार है सतीजी का समाधिस्थल
वृन्दावन। इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार बीते करीब पाँच सौ साल पहले श्रीधाम वृन्दावन में विद्यापीठ चौराहे के पास महान रसिक संत स्वामीहरिदासजी एवं उनकी धर्मपत्नी हरिमतीजी के मध्य घटित अलौकिक लीला का साक्षी रहा सती हरिमतीजी का समाधिस्थल प्रबंधकीय उपेक्षाओं के चलते गुजरे लम्बे समय से दुर्दशा का शिकार बना हुआ है।
इतिहासकार के मुताबिक समाधि के मुख्य गुम्बद के बीचोंबीच बड़े बड़े छेद हो गए हैं, जिनसे गंदा पानी टपकता है। समाधि के पृष्ठभाग पर टाइल या समुचित प्लास्टर भी नहीं है। दीवालों व छत में दरारें आती जा रहीं हैं। समाधि परिसर में लगे नल में पानी तक नहीं आता है। छत में लगे बिजली के कनेक्शनों में बल्ब नहीं लगे हैं और बिजली भी चालू नहीं है। मंदिर की हाई पावर्ड मैनेजमेंट कमेटी को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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