रिपोर्ट : LegendNews
अक्षय तीज पर्व पर श्रीबाँकेबिहारीजी प्रदान करेंगे चरण-सर्वांग दर्शन
वृन्दावन। अक्षयतीज पर्व पर धर्मधुरी श्रीधामवृंदावन में विराजित जन जन के आराध्य भगवान श्रीबाँकेबिहारीजी महाराज चरण-सर्वाँग दर्शन प्रदान करेंगे। इस अवसर पर भगवान को चंदनी रंग का अद्भुत परिधान धारण कराकर सतुआ के लडुआ, मेवा, फल मिष्ठान, ठंडाई व सर्बत इत्यादि शीतलता प्रदायक पदार्थों का विशेष भोग धराया जाएगा। प्रभुजी के चरणों में सृष्टि के प्रतीक रुप में चंदन के लड़डू (गोला) रखे जाएंगे। महोत्सव के अतर्गत श्रीबाँकेबिहारीजी सुबह चरणदर्शन तथा शाम को सर्वाँगदर्शन देकर भक्तों को कृतार्थ करेंगे।
उत्सवीय संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्रदत्त करते हुए ठाकुरजी के सेवायत इतिहासकार आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी ने बताया कि बिहारीजी मंदिर की पुरातन परम्परा के अनुसार अक्षयतीज को दोनों समय ठाकुरजी मंदिर गर्भग्रह में सजे रजत सिंहासन पर विराजमान होकर दर्शन देते हैं, इसलिए उस दिन फूलबंगला नहीं सजाया जाता। वर्षभर में सिर्फ़ एक ही दिन होने वाले ठाकुरजी के ये विशेष चंदन श्रृंगार एवं चरण-सर्वाँग दर्शन करने व इस अवसर पर भक्तों को मिलने वाले असाध्यरोग निवारक दिव्य प्रसादी चंदन की प्राप्ति हेतु 20 अप्रैल को आयोजित अक्षयतीजोत्सव में असंख्य श्रद्धालु जुटेंगे।
उन्होंने बताया कि इस मौके पर बड़ी संख्या में अविवाहित युवक-युवतियाँ अपनी वैवाहिक मनौती मांगते हुए प्रभुजी की सेवार्थ स्वर्णरजत निर्मित चरणचौकी चाँदी अथवा सोने की पायल अर्पित कर अपने विवाह की मनौती मांगेगे। ऐसी मान्यता है कि आखातीज पर प्रभु को चरणचौकी या पायल अर्पित करने वाले भक्त की मनोकामना शीघ्र ही पूर्ण हो जाती है। पूरे वर्ष में केवल इसी दिन बांकेबिहारी मंदिर में प्रभु के श्रीचरणों सहित चंदन लेपित सर्वांग स्वरूप के दर्शन सुलभ होते हैं।
इतिहासकार के मुताबिक विशेष चंदन लड़डू के साथ चरण दर्शन एवं पूरे अंग में चंदन लेपन किए हुए श्रीविग्रह के दर्शन का यह देव दुर्लभ योग श्रद्धालुओं के लिए अतुलनीय है। इस दिव्य उत्सव को भव्य रुप में मनाने हेतु हर वर्ष की भांति इस बार भी बंगसम्प्रदायी राधादामोदर, राधाश्यामसुन्दर, राधामदनमोहन, राधागोविंददेव, राधारमण, राधागोपीनाथ मंदिर के साथ ही साथ प्राचीन श्रीहरिदासपीठ मंदिर, राधावल्लभ मंदिर में ठाकुरजी के चंदन श्रृंगार के अलौकिक आयोजन की तैयारियां शुरु हो गईं हैं। यह चंदन लेपन सेवा मात्र श्रृंगार ही नहीं, बल्कि आराध्य की ग्रीष्म से रक्षा का प्रतीकात्मक भाव भी है।
उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया पर प्रभुचरणों में अर्पित चंदन को सुखाकर छोटी छोटी गोलियों का रूप दिया जाता है। यह प्रसादी चंदन भक्तों को लगाने के लिए नहीं अपितु खाने के लिए दिया जाता है, जिससे उन्हें तमाम असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। यह चंदन की गोलियां डाक या कोरियर द्वारा देश-विदेश में रहने वाले भक्तों तक पहुंचाई जाती हैं। आखातीजोत्सव के प्रति सभी वर्गों के लोग अटूट श्रद्धाभाव रखते हैं। इस दिन प्रभुजी सच्चे मन से की गई समस्त मनोकामनाएं सहज में ही पूर्ण कर देते हैं।
इतिहासकार आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी के अनुसार अक्षयतृतीया के लिए स्वर्ण रंग सर्वोत्कृष्ट माना जाता है, जो धन और स्वर्ग से मिलने वाली शुभता का प्रतीक है। स्त्री-पुरुषों व बच्चों हेतु सुनहरे रंग की धोती, साड़ी एवं वस्त्र पूजा के लिए एकदम उपयुक्त है। पीला रंग शुभ व पारंपरिक है, जो समृद्धि का प्रतीक और लक्ष्मीजी से संबंधित है। हरा, लाल, नारंगी तथा सुनहरा रंग भी उपयोग कर सकते हैं। परन्तु काला रंग नहीं पहनना चाहिए, क्यों कि हिंदू परंपरा में शुभ अवसरों पर काले रंग से परहेज किया जाता है ।
इतिहासकार के मुताबिक अक्षयतृतीया के दिन भगवानविष्णु एवं मातालक्ष्मी की एक साथ पूजा करनी चाहिए, इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना शुभमाना जाता है. साथ ही अक्षयतृतीया के दिन घर में पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठकर भगवान का ध्यान अवश्य करना चाहिए। अक्षयतीज पर्व पर पीली कौड़ी घर लाने से लक्ष्मीमाता की पूर्ण कृपा बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आखातीज पर स्वर्ण, जौ या पीली सरसों खरीदकर घर लाना भी विशेष फलदायी होता है। ऐसा भी माना जाता है कि अखतीज के दिन नमक खरीदने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। यह देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय कहा जाता है, ताकि घर हमेशा बरकत से भरा रहे। नमक से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। ऐसे में अक्षय तृतीया के दिन नमक खरीदना शुभ होता है।
सेवायत आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी बताते हैं कि अक्षयतीज को दान धर्म आदि पुण्यकार्य करने से जीव के लोक-परलोक सुधर जाते हैं। शास्त्रोक्त मान्यताओं के अनुसार दान अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें ज्ञानदान-विद्यादान अथवा सत्संग दान को सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि यह व्यक्ति को आत्मज्ञान, सुख और सही दिशा प्रदान करते हैं। इनके सुफल जन्म-जन्मांतर तक काम आते हैं।
इसके अतिरिक्त अन्नदान व्यक्ति की तात्कालिक आवश्यकता पूरी करते हैं। महादान की संज्ञा प्राप्त अन्नदान से जरूरतमंद लोगों की भूख मिटती है, जिससे उनकी जीवनरक्षा होती है।
इन्हीं के साथ सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण से कन्यादान को भी अतिउत्तम दानों में गिना जाता है। इनके अलावा अभयदान स्वरूप किसी को भयमुक्त करना या प्राणों की रक्षा करना भी अत्यंत पुण्यकारी है। वस्तुतः जो दान व्यक्ति के जीवन को बदल दे, वही सर्वश्रष्ठ दान है।
दो दिन रहेगी अक्षयतृतीया तिथि
आचार्य गोस्वामी ने बताया कि इस बार अक्षयतृतीया तिथि 19 अप्रैल की सुबह 10 बजकर 49 मिनिट से लेकर 20 अप्रैल की सुबह 7 बजकर 27 मिनिट तक रहेगी। दो दिन तक तिथि रहने के कारण कुछ मंदिरों में जहाँ 19 अप्रैल को उत्सव मनेगा, वहीं उदयतिथि के आधार पर पर्व आयोजित करने वाले जगप्रसिद्ध श्रीबाँकेबिहारी मंदिर सहित अधिकांश मंदिर-देवालय तथा आश्रमों में 20 अप्रैल को महोत्सव मनाया जाएगा। सृष्टि के प्रथम दिवस के रुप में प्रमाणित अक्षयतीज पर्व पर सप्त चिरंजीवियों में सम्मिलित भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव भी अत्यंत भव्य स्वरूप में मनाया जाएगा।
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